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आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का 33 वा मुनि दीक्षा दिवस : धर्मसभा में होंगे आशीर्वचन


चर्या शिरोमणि धरती के देवता 108 महामुनि राज विशुद्धसागर जी का 33 वाँ मुनि दीक्षा दिवस 21/11/24 गुरुवार को बिरुरु कर्नाटक में भव्य दीक्षा दिवस। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


 बिरूर – कर्नाटक, पट्टाचार्य श्रमण संस्कृति के महान संत शताब्दी देशना चार्य चर्या शिरोमणि धरती के देवता 108 महामुनि राज विशुद्धसागर जी का 33 वाँ मुनि दीक्षा दिवस 21/11/24 गुरुवार को बिरुरु कर्नाटक साक्षात संसघ की सन्निधि में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया की इस वसुंधरा के चलते फिरते भगवान, चर्या शिरोमणि यति राज आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी का पुरे भारत में कल दीक्षा दिवस मनाया जाएगा ।

आचार्य श्री का संक्षिप्त परिचय

परम पूज्य अध्यात्मयोगी श्रमणाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज

पूर्व नाम : बा.ब्रा. श्री राजेन्द्र कुमार जी जैन ( लला )

पिता श्री : श्री रामनारायण जी जैन ( समाधिस्थ – मुनि श्री विश्वजीत सागर जी )

माता श्री : श्रीमती रत्तीबाईजी जैन ( समाधिस्थ – क्षुल्लिका श्री विश्वमतिमाताजी )

जन्म स्थान : भिण्ड ( म . प्र . ) ,

गृह ग्राम : रूर

जन्म दिनांक : 18 दिसम्बर 1971

लौकिक शिक्षा : दसवीं

भाई / बहिन : पाँच भाई , दो बहिन

ब्रह्मचर्यव्रत कब : 16 नवम्बर 1988 तीर्थक्षेत्र बरासौं जी भिण्ड मध्यप्रदेश

क्षुल्लक दीक्षा : 11 अक्टूबर 1989 , भिण्ड ( म . प्र . )

नामकरण : क्षुल्लक श्री यशोधर सागर जी

ऐलक दीक्षा : 19 जून 1991 , पन्ना ( म . प्र . )

मुनि दीक्षा : 21 नवम्बर 1991 , कार्तिक सुदी पूर्णिमा

मुनि दीक्षा स्थल : तीर्थक्षेत्र श्रेयांसगिरि , जिला – पन्ना ( म . प्र . )

नामकरण : मुनि श्री विशुद्धसागर जी

आचार्य पद : 31 मार्च 2007 महावीर जयंती स्थान औरंगाबाद ( महाराष्ट्र )

दीक्षा गुरु : परम पूज्य गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज

भाषाज्ञान : हिन्दी , संस्कृत, प्राकृत

साहित्य सृजन : शताधिक आध्यात्मिक कृतियाँ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा : लगभग 146

विहार क्षेत्र : मध्यप्रदेश , उत्तरप्रदेश , छत्तीसगढ़ , महाराष्ट्र , कर्नाटक , राजस्थान ,विहार , झारखंड , तेलंगना ,

पग विहार : 100000 km लगभग

न्याय – अध्यात्म शास्त्रों का अध्ययन / अध्यापन एवं मौन

साधना प्रसिद्धि : आगम एवं अध्यात्ममयी सरल – सुबोध प्रवचनकार

रस त्याग : नमक , दही , तेल का जीवन पर्यन्त के लिए त्याग।

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