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अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का विहार और मंगल प्रवेश : गुणों की पूजा करो, नाम की नहीं


अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का मंगलवार सुबह क्लर्क कॉलोनी से विहार और श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, नंदानगर में मंगल प्रवेश हुआ। इसके बाद मुनि श्री के सानिध्य में भगवान की शांतिधारा की गई और नेमिनाथ विधान के साथ निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। पढ़िए यह रेखा संजय जैन की विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज का मंगलवार सुबह क्लर्क कॉलोनी से विहार और श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, नंदानगर में मंगल प्रवेश हुआ। समाज अध्यक्ष शीतल जैन में बताया कि मुनि श्री के मंगल प्रवेश पर मंदिर के बाहर मंगल कलश लेकर महिलाएं खड़ी थीं, उसके बाद मुनि का पाद पक्षालन किया गया। मुनि श्री के सानिध्य में भगवान की शांतिधारा की गई और नेमिनाथ विधान के साथ निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। मुनि ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को भावना भानी चाहिए क्योंकि संसार सब कर्म अधीन है। कोई शाश्वत नहीं है। जो मिला है, वह चला भी जाता है।

पुण्य, पाप, सुख, दुख, धन आदि कुछ भी शाश्वत नहीं है। राम, कृष्ण, रावण और उनका वैभव भी शाश्वत नहीं रहा है। राम सब कर्म का नाश कर परमात्मा बन गए तो कृष्ण भी तीर्थंकर लेकिन रावण का न तो धन रहा और न नाम, उसका सब चला गया। इसीलिए संसार में कोई शाश्वत है तो गुण है, इसलिए गुणों की पूजा करो, नाम की नहीं। विहार और प्रवचन सभा में अशोक जैन, लाभाचंद लुहाड़िया, गजेंद्र जैन, राजकुमार पाटनी, प्रकाश शाह मौजूद रहे।

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