महंगाई के इस दौर में जहाँ बेटियों की शादी का खर्च कई गरीब परिवारों के लिए बोझ बन जाता है। वहीं अंचल के समाजसेवी सुधीर आचार्य जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। उन्होंने न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी का बीड़ा उठाया, बल्कि समाज के सामने एक मिसाल भी पेश की है। अंबाह से पढ़िए, यह खबर…
अंबाह। महंगाई के इस दौर में जहाँ बेटियों की शादी का खर्च कई गरीब परिवारों के लिए बोझ बन जाता है। वहीं अंचल के समाजसेवी सुधीर आचार्य जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। उन्होंने न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी का बीड़ा उठाया, बल्कि समाज के सामने एक मिसाल भी पेश की है। आज़ एक और परिवार की बिटिया का घर बसाने में आचार्य और उनकी आचार्य आनंद टीम ने बर्तन, कपड़े सहित अन्य उपहार भेंट किए। यहां उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जनवरी से मई तक पांच परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने में सुधीर आचार्य और उनकी पत्नी डॉ. प्रगति शर्मा सहित आचार्य आनंद टीम ने सहयोग प्रदान किया है। इस संबंध में बताते हुए सुधीर आचार्य ने कहा कि प्रतिवर्ष 11 ऐसे परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने का संकल्प साधे हुए हैं, जो आर्थिक रूप बहुत कमजोर हैं एवं बेटियों के हाथ पीले करने में असमर्थ हैं। इस पुनीत कार्य में सुधीर आचार्य द्वारा प्रत्येक जोड़े को अपनी ओर से दरवाजे के बर्तनों का सेट, साड़ी तथा आचार्य आनंद टीम द्वारा अन्य उपहार भेंट किए जाते हैं।
‘बेटी के मान-सम्मान और विवाह की पूरे समाज की जिम्मेदारी
इस अवसर पर सुधीर आचार्य ने कहा कि कोई भी पिता पैसे की कमी के कारण अपनी बेटी की आंखों में आँसू न देखे। इसके लिए हर समर्थ परिवार को आगे आना चाहिए। बेटी पूरे समाज के मान-सम्मान और शादी विवाह की जिम्मेदारी होती है। जिसमें हर समाज और व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहिए। हमारा प्रयास है कि कोई भी बेटी सिर्फ गरीबी के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। उन्होंने आगे बताया कि उनकी संस्था ‘आचार्य आनंद क्लब’ एवं संजीवनी पिछले 20 सालों से ऐसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। अब तक 200 से अधिक बेटियों की शादियां करवा चुकी हैं। संस्था द्वारा शादी के लिए चयन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होता है। जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
लाभार्थी परिवारों ने जताया आभार
मजदूरी करने वाली वाली राधा बाई की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया ‘पति के गुजरने के बाद दो बेटियों की शादी की चिंता खाए जा रही थीं। इसी तरह दुर्घटना में दिव्यांग किशन लाल ने बताया काम धंधा चौपट होने के बाद पेट भरना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में उनकी बेटी की शादी की जिम्मेदारी सुधीर आचार्य और उनके साथियों ने ली।
समाज से की सहयोग की अपील
सुधीर आचार्य ने शहर के सक्षम लोगों और व्यापारियों से भी अपील की कि वे आगे आकर इस मुहिम का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि अगर हर समर्थ व्यक्ति एक बेटी की जिम्मेदारी ले ले तो समाज से दहेज जैसी कुप्रथा और गरीबी का अभिशाप खत्म हो सकता है।
आचार्य आनंद टीम के सेवाभावी साथी
सुधीर आचार्य के साथ सेवा कार्यों में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने वाले आचार्य आनंद टीम के साथियों में अजय जैन, अरविंद मावई, अंकित मिश्रा, बालकृष्ण शर्मा, मनोज शर्मा, विश्वनाथ गुर्जर, डॉ.प्रगति शर्मा, डॉ. सुशील फिजियोथैरेपिस्ट, डॉ. अनिल पचौरी, नरेश परमार, दुष्यंतसिंह तोमर, महेंद्र सखबार, बिंदुसारसिंह तोमर, कृष्णवीर सिंह तोमर, सुजाता तोमर, रविकांत कटारे प्रमुख रूप से शामिल हैं।













Add Comment