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श्रुत पंचमी पर जयपुर में निकली भव्य जिनवाणी रथ यात्रा, गूंजे जिनवाणी माता के जयकारे : राजस्थान जैन साहित्य परिषद के त्रिदिवसीय महोत्सव का श्रद्धाभाव के साथ हुआ समापन, विचार गोष्ठी एवं श्रुत स्कन्ध विधान भी रहे आकर्षण


राजस्थान जैन साहित्य परिषद द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत जयपुर में विशाल जिनवाणी (षट्खण्डागम) रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा, विचार गोष्ठी और श्रुत स्कन्ध विधान पूजन के माध्यम से श्रुत ज्ञान एवं जिनवाणी के महत्व का संदेश दिया गया। 


जयपुर, 19 जून। ज्ञान आराधना दिवस श्रुत पंचमी के उपलक्ष्य में राजस्थान जैन साहित्य परिषद द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय महोत्सव का समापन शुक्रवार को विशाल एवं भव्य जिनवाणी (षट्खण्डागम) रथ यात्रा के साथ हुआ। गाजे-बाजे, धार्मिक ध्वजों और श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच निकली रथ यात्रा ने पूरे शहर को धर्ममय वातावरण से सराबोर कर दिया।

छह दशकों से जारी है परंपरा

परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने बताया कि राजस्थान जैन साहित्य परिषद पिछले लगभग छह दशकों से जिनवाणी रथ यात्रा का नियमित आयोजन करती आ रही है। यह यात्रा जौहरी बाजार स्थित बड़ा मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए महावीर पार्क स्थित संघीजी के मंदिर पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।

उमरावमल सांघी ने दिखाई रथ यात्रा को हरी झंडी

रथ यात्रा को श्री महावीरजी अतिशय क्षेत्र के मानद मंत्री श्रेष्ठी उमरावमल सांघी ने ध्वज दिखाकर रवाना किया। यात्रा के दौरान मार्ग में आने वाले विभिन्न मंदिरों की समितियों एवं श्रुत साधकों ने जिनवाणी माता की मंगल आरती उतारकर श्रद्धाभाव से स्वागत किया।

सैकड़ों श्रुत साधकों ने निभाई सहभागिता

यात्रा में जयपुर की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं, महिला मंडलों एवं जैन संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राजस्थान जैन सभा के मनीष वैद एवं राखी जैन, युवा महासभा के प्रदीप लाला, महावीर स्कूल के सुनील बख्शी, पदमपुरा क्षेत्र के राजकुमार कोठारी, मंदिर महासंघ के विपिन बज़, मुनि सेवा संघ के सतीश खंडाका, महिला समिति राजस्थान अंचल की शालिनी बाकलीवाल एवं विद्युत लुहाड़िया सहित अनेक गणमान्यजन यात्रा में शामिल हुए।

धर्मसभा में हुआ सम्मान समारोह

महावीर पार्क स्थित संघीजी के मंदिर में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। दीप प्रज्ज्वलन डॉ. राजकुमारी परिवार द्वारा किया गया। परिषद के मंत्री महावीर चांदवाड़ एवं संयोजक रमेश गंगवाल ने बताया कि रथ यात्रा में श्रेष्ठी प्रद्युम्न पाटनी (सीए) ने सारथी तथा श्रुत सेवक छुट्टनलाल जैन ने विशेष भूमिका निभाई।

धर्मसभा में मुख्य अतिथि श्रेष्ठी शांतीलाल गंगवाल (सीए) तथा विशिष्ट अतिथि अशोक खंडाका उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का तिलक, माला, दुपट्टा एवं साफा पहनाकर सम्मान किया गया।

जिनवाणी सजाओ प्रतियोगिता के विजेता हुए सम्मानित

इस अवसर पर आयोजित जिनवाणी सजाओ प्रतियोगिता के प्रथम तीन विजेताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही रथ यात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल हुए बच्चों को भी पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

वक्ताओं ने बताया श्रुत ज्ञान का महत्व

धर्मसभा को विद्वान निर्मल बोहरा, डॉ. माधुरी, डॉ. विमल जैन, मुख्य अतिथि शांतीलाल गंगवाल, परिषद अध्यक्ष पदम जैन बिलाला, मंत्री महावीर चांदवाड़ एवं अन्य वक्ताओं ने संबोधित करते हुए जिनवाणी और श्रुत ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।

विचार गोष्ठी और श्रुत स्कन्ध विधान भी सम्पन्न

महामहोत्सव के अंतर्गत कीर्तिनगर जैन मंदिर में आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. कमलेश जैन ने श्रुत ज्ञान की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं जनकपुरी जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ श्रुत स्कन्ध विधान पूजन का आयोजन किया गया।

अनेक गणमान्यजन रहे उपस्थित

कार्यक्रमों में परिषद के राजकुमार बिल्टीवाला, महेश चांदवाड़, प्रद्युम्न पाटनी, राजेन्द्र पापड़ीवाल, हीराचंद वैद, योगेश टोडरका, सुदर्शन पाटनी, हरकचंद बड़जात्या, सुधीर लाली, उदयभान जैन सहित अनेक सदस्य एवं श्रुत साधक उपस्थित रहे।

परिषद अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। धर्मसभा का समापन जिनवाणी स्तुति एवं अर्घ समर्पण के साथ हुआ।

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