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जीवन में सत्य को स्वीकार करना तभी सम्यक ज्ञान संभव: अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी ने रामचंद्रनगर में दिया सभी को मंगल आशीर्वाद 


आदिनाथ से महावीर जयंती तक संयोजित धर्म पदयात्रा के शनिवार को 17वें दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर छत्रपतिनगर से अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में भगवान आदिनाथ के जयकारों और भक्ति भावना के साथ समाजजनों ने यात्रा आरंभ की। इस धर्म पदयात्रा छत्रपतिनगर के विभिन्न मार्ग और गलियों से बैंडबाजों पर भजनों की धुन पर भक्ति करते हुए महिला और पुरुष चल रहे थे। इंदौर से पढ़िए, प्रीतम लखवाल की यह रिपोर्ट…


इंदौर। आदिनाथ से महावीर जयंती तक संयोजित धर्म पदयात्रा के शनिवार को 17वें दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर छत्रपतिनगर से अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में भगवान आदिनाथ के जयकारों और भक्ति भावना के साथ समाजजनों ने यात्रा आरंभ की। इस धर्म पदयात्रा छत्रपतिनगर के विभिन्न मार्ग और गलियों से बैंडबाजों पर भजनों की धुन पर भक्ति करते हुए महिला और पुरुष चल रहे थे। मुनिश्री पूज्यसागर जी के सानिध्य में छत्रपतिनगर, महावीर बाग से चलते हुए रामचंद्रनगर की ओर आगे पदयात्रा का आगाज हुआ। एयरपोर्ट रोड से यह पदयात्रा रामचंद्रनगर की ओर बढ़ते हुए श्रद्धालुओं में अपार उत्साह नजर आया। रामचंद्रनगर में विभिन्न मार्ग से होते हुए श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। पूरी यात्रा मार्ग में समाजजनों और श्रद्धालुओं ने मुनिश्री पूज्यसागर जी के पाद प्रक्षालन और आरती की गई।

रामचंद्रनगर में भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने में आया। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन के दौरान भजन पर महिला श्रद्धालु भक्ति भाव से नृत्य करने लगी। मुनिश्री का 12 से अधिक स्थानों पर पाद प्रक्षालन किया गया। रामचंद्रनगर दिगंबर जैन मंदिर परिसर में ध्वजारोेहण किया गया। रामचंद्रनगर से भूपेंद्र जैन भोपाली, प्रदीप पहाड़िया, आरके जैन रानेका, राकेश विनायका, संजय पापड़ीवाल, पिंकेश बिलाला, रितेश पाटनी, गिरीश जैन, मनीष जैन सहित बड़ी संख्या में साधर्मी बंधु मौजूद रहे। ध्वजारोहण कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौधरी ने किया।

हम असत्य केे भंवर में फंसे हुए, इससे मुक्त होना होगा

रामचंद्रनगर स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री पूज्यसागर जी सानिध्य में श्रीजी का कलशाभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। इस दौर मुनिश्री ने मंत्रोच्चार कर इस विधि को संपन्न करवाया। कलशाभिषेक और शांतिधारा के बाद अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी ने अपनी मंगल देशना में कहा कि हमने जीवन में कभी सत्य को स्वीकार नहीं किया। सत्य को स्वीकार करने से ही सम्यक ज्ञान की राह आसान होती है। मुनिश्री ने कहा कि भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ और भगवान महावीर ने भी सत्य को स्वीकार किया और अपने संदेशों में सत्य को अपनाने के लिए कहा है।

मुनिश्री ने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि बुद्धि, बल और विद्वत्ता, ज्ञान में संपन्न होने के बाद भी उसका क्षय हुुआ और मरण को प्राप्त होना पड़ा। रावण ने कभी सत्य को स्वीकार नहीं किया। असत्य को अपनाकर अहंकार के चलते उसका अंत हुआ। अगर वह सत्य को स्वीकार करता तो उसका यह हाल नहीं होता। मुनिश्री ने एक चिड़िया के प्रयास का उदाहरण देते हुए प्रेरक बात कही कि एक बार जंगल में आग लग गई। चिड़िया उड़कर जाती और झील से चोंच में पानी भरकर लाती और आग पर डालती। इस पर लोग हंसने लगे कि चिड़िया के इस प्रयत्न से कहीं आग बुझेगी। मगर संदेश यह है कि उसने प्रयत्न तो किया। प्रवचन के उपरांत मुनिश्री ने रामचंद्रनगर दिगंबर जैन समाज के सभी लोगों से कहा कि आगामी 2027 में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज का इंदौर में चातुर्मास की पूरी संभावना है। कागदीपुरा में पंचकल्याण उन्हीं के सानिध्य में होना है। इसलिए इंदौर में उनके चातुर्मास के लिए यहां के सभी समाजजन जाकर श्रीफल अर्पित कर आचार्यश्री से निवेदन प्रस्तुत करें। प्रवचन के समापन के बाद आभार प्रदर्शन राकेश विनायका ने किया।

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