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भीतर की शक्ति से बड़ा कोई हथियार नहीं : मोक्ष सप्तमी पर मुनिश्री के प्रवचन में क्रोध, लालच अहंकार त्यागने का संदेश 


मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने मोक्ष सप्तमी पर प्रवचन में कहा कि मुकुट सप्तमी वह दिन है जब भगवान पार्श्वनाथ ने अपने संकल्प, तपस्या और अडिग विश्वास से मोक्ष का मुकुट पहना था। पथरिया में मुनिराजों के प्रवचन नित्य हो रहे हैं। इससे यहां धर्म की प्रभावना प्रबल हो रही है। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


पथरिया। मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने मोक्ष सप्तमी पर प्रवचन में कहा कि मुकुट सप्तमी वह दिन है जब भगवान पार्श्वनाथ ने अपने संकल्प, तपस्या और अडिग विश्वास से मोक्ष का मुकुट पहना था। पथरिया में मुनिराजों के प्रवचन नित्य हो रहे हैं। इससे यहां धर्म की प्रभावना प्रबल हो रही है। उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। गुरुवार को मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी ने प्रवचन में कहा कि आज का दिन है मुकुट सप्तमी, वह दिन जब भगवान पार्श्वनाथ ने अपने संकल्प, तपस्या और अडिग विश्वास से मोक्ष का मुकुट पहना था।

मुनिश्री ने आगे कहा कि उन्होंने हमें सिखाया कभी हार नहीं माननी, कभी रुकना नहीं क्योंकि, भीतर की शक्ति से बड़ा कोई हथियार नहीं। मोह, माया और आसक्ति को छोड़कर उन्होंने दिखाया कि असली आज़ादी क्या होती है। आज हम सबको भी अपने मन के अंदर की जंजीरों को तोड़ना है, क्रोध, लालच और अहंकार से लड़ना है और संयम की वो ताकत पकड़नी है, जो हमें आत्मा की ऊंचाइयों तक ले जाए। उठो! जागो! और प्रण करो कि इस मुकुट सप्तमी पर हम भी उस परम सत्य की ओर कदम बढ़ाएंगे। वो सत्य जो सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा जोश है।

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Shreephal Jain News

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