आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सान्निध्य में श्री महावीर स्वामी मंडल विधान भक्ति भाव से संपन्न हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सान्निध्य में श्री महावीर स्वामी मंडल विधान भक्ति भाव से संपन्न हुआ। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 35 पिच्छी पाटौदी जी के मंदिर में विराजित हैं। भागचंद, रमेश, प्रदीप डॉ. सुशील ने बताया कि लश्कर एवं पाटोदी मंदिर समिति द्वारा श्री महावीर स्वामी मंडल विधान का आयोजन आचार्य संघ सानिध्य में किया गया। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी द्वारा रचित श्री चादनपुर के महावीर स्वामी मंडल विधान में पुण्यशाली परिवारों द्वारा श्री जी के अभिषेक पश्चात विधानाचार्य श्री रमेश गंगवाल के निर्देशन में तीन स्तरीय मंडल पर 36 श्रीफल अर्घ्य समर्पित किया। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने बताया कि प्रथम वलय में श्री महावीर स्वामी के अनंत ज्ञान ,दर्शन सुख ,वीर्य तथा नव केवल लब्धि गुणों के अध्र्य समर्पित किए गए हैं।
दूसरे वलय में श्री, म, हा , वी, रा, य, न , मो, न , म, भगवान के श्रद्धा पूर्वक गुणों के स्मरण से शरीर के विभिन्न रोग दूर हो सकते है। तृतीय वलय ओर जयमाला में श्री महावीर स्वामी के विगत जन्मों को बताया गया है। आचार्य श्री ने बताया कि कर्मों परिणामों के कारण श्री महावीर स्वामी के जीव अनेक भवों में अवतरित हुए। 5 अप्रैल को पाटोदी मंदिर से संघ सहित विहार कर नारायण सर्कल भट्टारक जी की नसिया अनेक मार्गों से होते हुए प्रवेश होगा।













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