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आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस: मुनि श्री योगसागरजी के सानिध्य में आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति हुई 


आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। जो सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया। उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन ने किया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से किया गया। इस अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया। इस अनुपम बेला में दूरदराज से भक्त भी पधारे। साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

आचार्य श्री साधना के हिमालय थे 

इसके बाद गणिनी आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। मुनिश्री निर्भीक सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री साधना के हिमालय थे, जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। एक गीत के माध्यम से कहा- ‘गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।’ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे। मुनिश्री निर्माेह सागरजी महाराज ने कहा कि हमारे जो भी थे वही थे, जो कुछ छोड़ा था। उन्हीं के लिए छोड़ा था। उनकी पूर्ति नहीं हो सकती। गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है। गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।

आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है

मुनि श्री निरोग सागरजी महाराज ने आचार्य श्री ने कहा कि जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन, आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे। आचार्य श्री ने अपनी चर्या में दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे। मुनि श्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना, मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था, 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया। इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु हैं। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।

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