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मुनिराजों ने मुनि श्री पूर्णसागर जी का केशलोच किया: संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं मुनि श्री पूर्णसागर जी महाराज


मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षित मुनि श्री पूर्णसागर जी संल्लेखना की ओर हैं। वह एक दिन छोड़कर मुनक्के का पानी ले रहे हैं। आपका केश लोचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्य सागर, श्री हितेंद्र सागर, श्री चिंतन सागर सहित अन्य मुनिराजों ने किया। धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की यह खबर…


धरियावद। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी यहां विराजित है। मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षित मुनि श्री पूर्णसागर जी संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं। वह एक दिन छोड़कर मुनक्के का पानी और जल ले रहे हैं। सुखद संयोग रहा कि आपका केश लोचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्य सागर, श्री हितेंद्र सागर, श्री चिंतन सागर सहित अन्य मुनिराजों ने किया। गुरुवार को संभवतः उनका अंतिम केशलोचन हुआ क्योंकि, केशलोचन 3 से 4 माह की अवधि के बीच किया जाता है। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी मुनि श्री पुण्य सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर सहित सभी साधु उपस्थित रहे। वीणा दीदी ने वैराग्यमय भजन गाकर तप की अनुमोदना की।

मुनि श्री का जीवन परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि 

मुनि श्री पूर्णसागर जी के गृहस्थ अवस्था का नाम रतनलाल मेहता है। आपका जन्म 1 जनवरी 1943 को थांदला में सुखलाल मेहता के घर हुआ। आपकी माता का नाम सुडी बाई मेहता था। आपने मुनि श्री पुण्यसागर जी से सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में 9 जुलाई 2023 को क्षुल्लक दीक्षा तथा मुनि दीक्षा जन्मभूमि थांदला में मुनि श्री पुण्य सागर जी से 6 मई 2024 को ग्रहण की। आपकी गृहस्थ अवस्था की पत्नी भी मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री पूर्णिमामति बनी थीं। माताजी की समाधि हो चुकी है। थांदला नगर से अभी तक 6 दीक्षा हो चुकी हैं। जिसमें मुनि श्री पुण्य सागर, श्री परमेष्ठि सागर जी, श्री महोत्सव सागर ,श्री उपहार सागर, श्री पूर्ण सागर, आर्यिका श्री पुण्यमति, आर्यिका श्री पूर्णिमा मति शामिल रहीं।

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