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दूसरों की मदद करने के सुख बखान नहीं हो सकता : मुनि श्री सर्वार्थ सागर ने परहित को सबसे श्रेष्ठ किया निरूपित


पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का ससंघ चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। इस दौरान प्रभु भक्ति, आराधना, अभिषेक, पूजन आदि चल रहे हैं। इसी दौरान पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी के प्रवचन भी हो रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


पथरिया। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहे हैं। इस दौरान प्रभु भक्ति, आराधना, अभिषेक, पूजन आदि चल रहे है। इसी दौरान पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी के प्रवचन भी हो रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को धर्म सभा में कहा कि जीवन में असली खुशी कहां मिलती है? क्या दौलत में? क्या नाम और शोहरत में? नहीं। जीवन की सबसे बड़ी खुशी तब मिलती है, जब हम किसी ज़रूरतमंद की मदद करते हैं।

जब किसी की आँखों में आँसू हों और हम उन्हें मुस्कान दे सकें, तब जो सुकून मिलता है, वो दुनिया की कोई चीज़ नहीं दे सकती। मदद करना केवल दान देना नहीं है। एक सहारा, एक शब्द, एक मुस्कान भी किसी का जीवन बदल सकती है। जैसे नदियाँ बिना स्वार्थ के बहती हैं और सबको जल देती हैं, वैसे ही हमें भी अपना जीवन दूसरों के लिए उपयोगी बनाना चाहिए।

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