मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने अपने गुरु पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि हम शरीर से गुरु से दूर हैं, लेकिन मेरा मन और मेरा हृदय आज भी गुरु के चरणों में है। वसगडे से पढ़िए, श्रीफल साथी अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
वसगडे (महाराष्ट्र)। पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज और मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज वर्तमान में वसगडे में विराजमान हैं। विराजमान मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने अपने गुरु पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि हम शरीर से गुरु से दूर हैं, लेकिन मेरा मन और मेरा हृदय आज भी गुरु के चरणों में है। गुरु जी का आशीर्वाद सदा मेरे साथ है। उन्होंने आगे कहा कि गुरु की महिमा अपरंपार है। उनके बिना जीवन व्यर्थ है। गुरु ही ज्ञान का दीप जलाकर जीवन के अंधकार को दूर करते हैं। जिस प्रकार घर की शोभा माँ से बढ़ती है, उसी प्रकार शिष्य की शोभा गुरु से होती है।
आचार्य भगवन के चरणों में नमन
मुनि श्री ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का विहार वर्तमान में राजधानी दिल्ली की ओर चल रहा है। आज समस्त जिन दर्शन की शोभा आचार्य भगवन विशुद्ध सागर जी महाराज से बढ़ रही है। हम आचार्य भगवन के चरणों में नमन करते हैं।
जयसिंहपुर में 19 जुलाई को होगा मंगल प्रवेश
मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का चातुर्मास 2026 जयसिंहपुर में होगा। 19 जुलाई को प्रातः 7 बजे जयसिंहपुर में उनका मंगल प्रवेश होगा।
28 जुलाई को मंगल कलश स्थापना
चातुर्मास कार्यक्रम के अंतर्गत 28 जुलाई को मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन की जिम्मेदारी श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जयसिंहपुर चौथी गली एवं सकल दिगंबर जैन समाज, जयसिंहपुर द्वारा ली गई है। समाज के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर लाभ लेने की अपील की है।













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