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मांगलिक कार्यक्रम में भव्य सिंह द्वार का किया शिलान्यास: आचार्यश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ आयोजन 


आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी महाराज ने सिंह द्वार के शिलान्यास अवसर पर कहा कि मानव की जैसी दृष्टि होती है, वैसी सृष्टि उसे दिखाई देती है। जीवन में उपदेश की नहीं उपचार की जरूर होती है। कोटा के आर के पुरम स्थित श्री मुनि सुव्रतनाथ त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में सिंहद्वार बनाया जा रहा है। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर…


कोटा। जंगल वाले बाबा मुनि चिन्मय सागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा से निर्मित आर के पुरम स्थित श्रीमुनि सुव्रतनाथ त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सिंहद्वार का भव्य शिलान्यास का मांगलिक कार्यक्रम पंडित उदय शास्त्री के निर्देशन में हुआ। इस भव्य सिंह द्वार के शिलान्यास कर्ता विनोद जैन टोरडी, समिता जैन, अभिषेक जैन, प्रासुक जैन परिवार जनों ने किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि इस अवसर पर सकल जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज महामंत्री पदम बडला कार्याध्यक्ष जेके जैन, मनोज जायसवाल, विमल जैन नांता, दीपक जैन, मुकेश जैन, पंकज जैन, राजेंद्र गोधा, चंद्रेश जैन, पदम जैन, हरकचंद जैन, विमल जैन (दरा), राजेंद्र श्रीमाल उपस्थित थे। मंदिर समिति के महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि प्रातः काल नित्य अभिषेक के बाद शांतिधारा आचार्य श्री के सान्निध्य में विश्व शांति की मंगल कामना से की गई। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष लोकेश बरमूडा ने बताया कि धर्मसभा में चित्र अनावरण मंगल दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट की मांगलिक क्रियाएं की गई। धर्मसभा संचालन पंडित रविंद्र जैन एवं पारस जैन ने किया।

सोच और विचार का मानव जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव 

धर्मसभा में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने कहा कि आज सबसे बड़ी विडंबना है कि सब उपदेश देते हैं, उपचार नहीं करते जबकि, उपदेश की नहीं उपचार की परम आवश्यकता है। जैसी व्यक्ति की सोच होती है। उसकी दृष्टि वैसी हो जाती है। मानव को अपनी सोच सदैव सकारात्मक रखना चाहिए। सोच और विचार का मानव जीवन पर बहुत बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। आज मानव की स्थिति ऐसी है कि गंगा गए गंगादास जमुना गए जमुनादास। जहां देखी तवा परात वहीं गुजरी रात। ऐसा नहीं होना चाहिए।

विद्यार्थियों को धर्म उपदेश प्रदान किया

देव शास्त्र गुरु के प्रति जीवन में सच्ची श्रद्धा भक्ति और समर्पण की आवश्यकता है। यही सम्यक दृष्टि का सच्चा मार्ग है। दूसरों के प्रति सदैव मैत्री भाव रखे, जैसा कि मेरी भावना में कहा गया है कि मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे। दीन दुःखी जीवों पर मेरे उर से करुणा स्रोत बहे। दोपहर में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज ससंघ विश्व विद्यालय में गए। जहां पर विद्यार्थियों को धर्म उपदेश प्रदान किया। वहीं पर पौधरोपण भी किया गया।

13 नवंबर को होगा विहार 

शाम को आनंद यात्रा के बाद संगीत के साथ भक्तामर पाठ मंगल आरती की गई। मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि 13 नवंबर को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ जगपुर विमल जैन के फार्म हाउस के लिए विहार करेंगे।

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