बच्चों और युवाओं में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और नैतिक मूल्यों के सिंचन के उद्देश्य से श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जबरी बाग नसिया में ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। 26 अप्रैल से प्रारंभ हुआ यह शिविर 3 मई तक चलेगा। इंदौर से पढ़िए, हरिहरसिंह चौहान की यह रिपोर्ट…
इंदौर। बच्चों और युवाओं में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और नैतिक मूल्यों के सिंचन के उद्देश्य से श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जबरी बाग नसिया में ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। 26 अप्रैल से प्रारंभ हुआ यह शिविर 3 मई तक चलेगा, जिसमें न केवल बच्चे बल्कि युवा और बुजुर्ग भी धर्म की महत्ता को समझने और आत्मसात करने के लिए एकत्रित हो रहे हैं।
संस्कारों के साथ व्यक्तित्व निखार
इस ग्रीष्मकालीन शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि खेल-कूद और मनोरंजन के माध्यम से बच्चों को धर्म की शिक्षा दी जा रही है। सांगानेर (राजस्थान) से पधारे विद्वान भैया संकेत शास्त्री और सक्षम शास्त्री के सानिध्य में शिविरार्थी व्यक्तित्व विकास के गुर सीख रहे हैं। शिविर का मुख्य लक्ष्य बच्चों को आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों यानी भारतीय संस्कृति से जोड़कर रखना है।
खेल-खेल में धर्म की सीख
पाठशाला के छोटे-छोटे बच्चों के लिए यह शिविर किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्हें संस्कारों के साथ-साथ ऐसे खेल खिलाए जा रहे हैं, जो उनकी बौद्धिक क्षमता और चारित्रिक विकास में सहायक हों। आयोजन समिति की दर्शनी जैन, सारिका जैन और सपना जैन ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि शिविर का वातावरण पूरी तरह धर्ममय और ऊर्जावान बना हुआ है।
संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन
शिविर के माध्यम से समाज के युवाओं को उत्तम संस्कारों के साथ भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्वानों द्वारा दिए जा रहे व्याख्यान जीवन जीने की कला और नैतिकता पर केंद्रित हैं, जो आज के समय में नई पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यदि आप भी अपने बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं, तो 3 मई तक चलने वाले इस शिविर का लाभ उठा सकते हैं।













Add Comment