श्री दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशियां बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गईं। जैसे ही अयोध्या नगरी में राजा नाभिराय के दरबार में माता मरुदेवी द्वारा तीर्थंकर बालक को जन्म देने का समाचार पहुंचा, पूरा पांडाल खुशियों से झूम उठा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..
टीकमगढ़। निकटवर्ती श्री दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशियां बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गईं। जैसे ही अयोध्या नगरी में राजा नाभिराय के दरबार में माता मरुदेवी द्वारा तीर्थंकर बालक को जन्म देने का समाचार पहुंचा, पूरा पांडाल खुशियों से झूम उठा।
प्रातःकालीन आयोजन
इससे पूर्व प्रातः बेला में भगवान का अभिषेक पूजन किया गया तथा विश्व शांति एवं जगत कल्याण की भावना से वृहद शांतिधारा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। प्रातः 7:30 बजे बालक आदिकुमार के जन्म की घोषणा होते ही पांडाल “भगवान आदिनाथ की जय” के जयकारों से गूंज उठा। विभिन्न वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों के बीच जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गईं।
भव्य शोभायात्रा
जन्म कल्याणक के अवसर पर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। भगवान की प्रतिमा को रथ में विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण कराया गया।शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे, बजरंग अखाड़ा हटा, रमतुला बुंदेली राबला पार्टी, ढोल-नगाड़े एवं पार्श्व म्यूजिकल ग्रुप के दिव्य घोष ने अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
धार्मिक झांकियां एवं मंचन
इसके पश्चात सौधर्म इंद्र द्वारा भगवान को ऐरावत हाथी पर विराजमान कर सुमेरु पर्वत ले जाने का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया, जहां भगवान का अभिषेक किया गया। पंडाल में भगवान की बाल क्रीड़ाओं का मंचन किया गया। श्रद्धालुओं ने पालना झुलाकर अपनी आस्था व्यक्त की। भगवान के जन्म के साथ ही पूरे पांडाल में जयकारों की गूंज और पुष्पवर्षा का दृश्य अत्यंत भावुक रहा। जैन संत-मुनिराजों के सानिध्य में अभिषेक, शांतिधारा एवं भक्ति गीतों के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मसभा एवं उपदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा गया कि महापुरुषों के गुण-स्मरण से पुण्य की वृद्धि होती है। महापुरुषों का स्मरण शांति और आनंद प्रदान करता है तथा पाप कर्मों का क्षय करता है। उपदेश में यह भी बताया गया कि शुभ कर्म करने वाले जीव स्वर्ग और मोक्ष को प्राप्त करते हैं, जबकि अशुभ कर्म करने वाले जीव विभिन्न योनियों में दुःख भोगते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सद्कर्मों को अपनाकर महापुरुषों के आदर्शों पर चलना चाहिए।
आगामी कार्यक्रम
महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी एडवोकेट प्रभात जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि 31 मार्च को भगवान का तप कल्याणक एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।













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