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जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ आयोजन : मुनि श्री प्रांजल सागर जी का अवतरण दिवस मनाया गया


झुमरी तिलैया के जैन मोहल्ला में जन्मे जैन संत, नगर गौरव परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज का अवतरण दिवस जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन जैन संत मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज एवं मुनि श्री शुभानंदी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन की रिपोर्ट…


कोडरमा / झुमरी तिलैया। झुमरी तिलैया के जैन मोहल्ला में जन्मे जैन संत, नगर गौरव परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज का अवतरण दिवस जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन जैन संत मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज एवं मुनि श्री शुभानंदी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्री 1008 आदिनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। इसके पश्चात मुनि श्री का संगीतमय पूजन सुरेन्द्र जैन काला, आशा जैन गंगवाल एवं नीलम जैन सेठी के निर्देशन में किया गया। समाज के सदस्यों के साथ विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और भक्ति भाव से पूजन किया।

वैराग्य से दीक्षा तक की प्रेरक यात्रा

ज्ञात हो कि मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज को लगभग 15 वर्ष पूर्व आर्यिका विभा श्री के सान्निध्य में वैराग्य की प्रेरणा मिली। इसके पश्चात उन्होंने जैन संत गुरु आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने 10 मार्च 2011 को सम्मेद शिखर जी की पवित्र भूमि पर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की। तब से वे अपने आचार्य के साथ पूरे भारत में पदयात्रा करते हुए धर्म प्रभावना में संलग्न हैं। वर्तमान में आचार्य संघ मेरठ (उत्तर प्रदेश) में विराजमान है।

जैन संत का जीवन अत्यंत कठिन — मुनि श्री पुण्यानंदी

इस अवसर पर मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज ने कहा कि वह नगरी धन्य होती है, जहाँ जैन संत का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिक युग में जैन संत बनना अत्यंत कठिन साधना है। उन्होंने बताया कि जैन संत एक समय हाथों में आहार ग्रहण करते हैं, पूरे देश में पैदल विहार करते हैं, स्नान नहीं करते, केश लोचन (हाथों से बाल उखाड़ना) करते हैं, ये सभी कठोर संयम साधना के अंग हैं, जिन्हें निभाना अत्यंत कठिन है।

समाजजनों ने व्यक्त किए श्रद्धाभाव

कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारीगण एवं श्रद्धालुओं ने भी मुनि श्री के प्रति अपने श्रद्धाभाव व्यक्त किए। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा

स्थानीय जैन समाज द्वारा 30 अप्रैल को मुनि श्री के सान्निध्य में भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत 28 अप्रैल को जैन महिला समाज एवं आचार्य विद्यासागर पाठशाला के बच्चों द्वारा गौशाला में जाकर गायों को चारा, चोकर, गुड़ एवं रोटी खिलाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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