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श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया अक्षय तृतीया का महापर्व: समाजजनों ने समाजजनों ने समझा दान दिवस का महत्व 


जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का एक वर्ष पूर्ण होने पर राजा श्रेयांश ने इक्षु रस का आहार दान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया तब से दान की परंपरा के साथ अक्षय तृतीया महापर्व मनाया जाता है। रविवार को प्रातः देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर महामस्तकाभिषेक एवं मुनि श्री के मुखारबिंद से वृहद शांतिधारा की गई। झुमरी तिलैया से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर…


झुमरीतिलैया। श्री दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज और मुनि श्री भाव सागर जी के सानिध्य में अक्षय तृतीया महापर्व श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया। जिसमें रविवार को प्रातः देवाधिदेव आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर महामस्तकाभिषेक एवं मुनि श्री के मुखारबिंद से वृहद शांतिधारा की गई। अक्षय तृतीया महापर्व की संगीतमय पूजन सुबोध-आशा जैन गंगवाल ने करवाई। इस अवसर पर मुनि श्री कहा कि अक्षय तृतीया जैन धर्मावलम्बियों का महान धार्मिक पर्व है। इस दिन हज़ारों वर्ष पहले जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान ने एक वर्ष की पूर्ण तपस्या करने के बाद इक्षु (गन्ने) रस से आहार किया था। राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को आहारदान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया था, अतः यह तिथि अक्षय तृतीया के रूप में मानी जाती है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य बाहरी सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और शुद्धि है। अक्षय तृतीया का यह संदेश अत्यंत स्पष्ट है कि त्याग, तप, संयम और सम्यक आचरण ही आत्मोन्नति के वास्तविक साधन और दान हैं। भगवान ऋषभदेव का आदर्श जीवन और राजा श्रेयांस की सम्यक भावना यह दर्शाती है कि जब ज्ञान, श्रद्धा और आचरण का समन्वय होता है, तभी धर्म का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है। यही इस पावन तिथि का शाश्वत और अक्षय संदेश है, जो प्रत्येक युग में समान रूप से प्रासंगिक और प्रेरणादायक बना रहेगा। रविवार को आचार्य विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों और समाज के लोगों द्वारा मुनि श्री को नवधा भक्ति के साथ आहार दिया और बच्चों ने कई नियम भी लिया। मुनि श्री ने पाठशाला के बच्चों को विशेष आशीर्वाद दिया।

साथ ही जैन समाज द्वारा पूरे नगर की जनता को गन्ने का रस का वितरण किया गया। सिंयोजक मुकेश जैन अजमेरा, आनंद जैन पांड्या ने बताया कि सभी श्रावक गण को भगवान के आहार की खुशी में इक्षुरस वितरण किया गया है। जो अपने आप मे एक अलग और अनूठा कार्यक्रम हुआ। साथ ही जीव दया का ध्यान रखते हुए गो माता को भी चोकड़़ और खीरा खिलाया गया। इन सभी कार्यक्रम में सहयोग देने वाले प्रदीप जैन छाबड़ा, निर्मल जैन छाबड़ा, शेफाली जैन कासलीवाल, शानू-नैनी जैन सेठी के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, बिनोद जैन अजमेरा, दिलीप जैन बाकलीवाल, राजीव जैन छाबड़ा, पीयूष जैन कासलीवाल, संजय जैन गंगवाल, प्रिया जैन पांड्या ने योगदान दिया।

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