Tag - स्वाध्याय

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महरौनी में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन : धर्म और संस्कारों से जुड़ रही नई पीढ़ी

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महरौनी में...

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नौगामा में शुरू हुआ श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर, धर्म और संस्कारों की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में 14 मई तक चलेंगे विविध धार्मिक एवं संस्कारमूलक प्रशिक्षण वर्ग

नौगामा (बांसवाड़ा) में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित शिविर में बच्चों, युवाओं...

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श्रावक-श्राविकाओं को प्रतिदिन छह आवश्यक कर्म करना जरूरी : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य का किया विवेचन 

गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्म कालीन वाचना कर रहे हैं। उन्होंने...

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दीपिका, खुशबू, दिशा, सुविधि और अनंत देंगे रत्नाकर अवार्ड परीक्षा : जनकपुरी में श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर स्वाध्याय प्रभावना के साथ संपन्न

श्री दिगम्बर जैन मंदिर जनकपुरी ज्योतिनगर में 17 मई से चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर स्वाध्याय व धर्म प्रभावना की भावना के साथ गुरुवार को भव्य...

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विनय, जिनवाणी स्वाध्याय मोक्ष का द्वार: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बोले-परमेष्ठी के चरण के साथ आचरण भी अपनाएं 

चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में मंगलवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुणों की व्याख्या की। इसमें जिनवाणी के 11 अंग...

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प्राचीन मंदिरों का संरक्षण जीर्णाेद्धार अधिक महत्वपूर्ण : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तीर्थों और मंदिरों की सुरक्षा पर दिया बल 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण...

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पूर्ण ज्ञान तथा कर्म सिद्धांत का ज्ञान होना आवश्यक: धर्मसभा में मुनिश्री के प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं धर्मप्रेमी श्रद्धालु 

संत अपनी इच्छा से शरीर छोड़ते हैं, क्योंकि वे शरीर के बंधन से मुक्त होते हैं । यह उदगार मुनि श्री संभव सागरजी महाराज ने भगवती आराधना ग्रंथ का स्वाध्याय कराते...

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झांकियों में साकार किए जैन धर्म के सिद्धांत: सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत दिग्विजय यात्रा में उमड़ा सकल समाज 

श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत तिलक नगर से दिग्विजय यात्रा निकाली गई। इसमें दिगंबर समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। यात्रा में बैंडबाजों...

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आत्मा को शुद्ध और जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम सिद्धचक्र विधान: तिलकनगर में आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुई विधान की शुरूआत 

आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में आठ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरूआत हुई। तिलकनगर जैन मंदिर परिसर में महोत्सव को लेकर...

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तीर्थंकर कुल का मनुष्य जीवन कीमती रत्न के समान है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा- इसकी कर्म रूपी चोरों से सुरक्षा जरूरी 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जिनालय नसिया में शांतिनाथ विधान के पूजन के समय मंगल देशना में कहा कि आज श्री आदिनाथ जिनालय में आप श्री...

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