Tag - स्वाध्याय

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पूर्ण ज्ञान तथा कर्म सिद्धांत का ज्ञान होना आवश्यक: धर्मसभा में मुनिश्री के प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं धर्मप्रेमी श्रद्धालु 

संत अपनी इच्छा से शरीर छोड़ते हैं, क्योंकि वे शरीर के बंधन से मुक्त होते हैं । यह उदगार मुनि श्री संभव सागरजी महाराज ने भगवती आराधना ग्रंथ का स्वाध्याय कराते...

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झांकियों में साकार किए जैन धर्म के सिद्धांत: सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत दिग्विजय यात्रा में उमड़ा सकल समाज 

श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत तिलक नगर से दिग्विजय यात्रा निकाली गई। इसमें दिगंबर समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। यात्रा में बैंडबाजों...

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आत्मा को शुद्ध और जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम सिद्धचक्र विधान: तिलकनगर में आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुई विधान की शुरूआत 

आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में आठ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरूआत हुई। तिलकनगर जैन मंदिर परिसर में महोत्सव को लेकर...

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तीर्थंकर कुल का मनुष्य जीवन कीमती रत्न के समान है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा- इसकी कर्म रूपी चोरों से सुरक्षा जरूरी 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जिनालय नसिया में शांतिनाथ विधान के पूजन के समय मंगल देशना में कहा कि आज श्री आदिनाथ जिनालय में आप श्री...

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सिद्धत्व के लिए महावीर के पथ पर अग्रसर मुनि श्री सिद्धसागर जी: नांद्रे में मनाया जाएगा मुनिश्री का दीक्षा दिवस महोत्सव 

मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का दूसरा दीक्षा दिवस नांद्रे में श्रद्धा भक्ति से मनाया जाएगा। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17...

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सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया 

आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में...

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शास्त्रों से चारित्र को बनाने वाला ज्ञान मिलता है: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने ज्ञान की विशालता का परिचय करवाया 

शनिवार सुबह आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने ज्ञान के विषय में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान सुख को देता है और सुख का परिहार करता है। यह पूरे जीवन का...

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40 श्रावकों ने गोचरी दया में भाग लिया जिनशासन की सेवा की : गोचरी दया के अवसर पर लघु नाटिका का किया मंचन

एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार...

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तपस्या करने से होती कर्मों की निर्जरा : मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी ने समझाया तप का अर्थ

श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन बुधवार को उत्तम तप धर्म पर प्रवचन देते हुए मुनि श्री गुरुदत्त सागरजी ने कहा कि तप का...

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पर्युषण पर्व में आचार्य श्री बोले – इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी तपस्या : तपश्चरण से जीवन में निखार और परिणामों में निर्मलता – आचार्य निर्भय सागर

ललितपुर में पर्युषण पर्व के दौरान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि तप आत्मा को निर्मल बनाता है और इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी साधना है।...

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