अपने गुणों को ही संसार में सर्वश्रेष्ठ समझकर औरों को दीन, हीन, नीच, कमजोर समझना और देखना अहंकार की श्रेणी में आता है। उक्त विचार सप्तम पट्टाचार्य श्री...
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तीर्थ क्षेत्रों पर जाने से, वहां की वंदना, दर्शन, पूजन करने से आत्म शांति मिलती है। मन के विकार दूर होते हैं, मन निर्मल होता है। उक्त विचार सप्तम पट्टाचार्य...
वर्षा योग समिति 2023 के मार्गदर्शन एवं आचार्य श्री 108 ज्ञेय सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में 20 अगस्त को शिक्षक सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का जिला स्तरीय...
प्रत्येक मनुष्य के मन में एक प्रश्न रहता है कि भगवान से कुछ मांगना चाहिए या नहीं मांगना चाहिए। इस संबंध में जिनागम तो सीधा सा उत्तर देता है कि क्या सूर्य से...
राष्ट्र संत सराकोद्धारक आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के आशीर्वाद से मुरैना के श्री ज्ञान तीर्थ एबी रोड पर वर्षा योग समिति 2023 के मार्गदर्शन एवं आचार्य श्री...
जैन मिलन महिला द्वारा शासकीय विद्यालय में बच्चों को पठन पाठन संबंधी सामग्री वितरित की गई। विद्यालय में जैन मिलन महिला द्वारा बच्चों को कॉपी, पेंसिल किट एवं...
दूसरे की उन्नति को देखकर जलना नहीं चाहिए जबकि उसकी उन्नति का क्या कारण है इसे देखकर उससे सीखना चाहिए और अपनी अउन्नति के कारण को भी देखना चाहिए । यह विचार...
सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में अच्छी शिक्षा...
पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट… मुरैना। संसार में संगति का बहुत महत्व है। हमें संगति का सदैव ध्यान रखना चाहिए। जो मन, कार्य और बुद्धि से परम हंस हैं, उन्हें...
जीवन में संस्कारों का बहुत महत्व है। संस्कारहीन जीवन पशु समान हैं। संस्कारी व्यक्ति अपने देश, समाज एवं कुल का नाम रोशन करता है। जीव दया के तहत मूक पशु...








