Tag - मंगल देशना

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आदिनाथ नहीं रावण हो पैदा होगाः हम पुण्य की क्रिया छोड़ पाप की क्रिया में बढ़ रहे-मुनिश्री पूज्य सागरजी 

अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचन हो रहा है। आदिनाथ पुराण का वर्णन करते हुवे बताया की अगर तुम्हें भी अपने...

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अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचनः 23 मार्च को भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव 

अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचन हो रहा है। आदिनाथ पुराण का वर्णन करते हुवे बताया की यदि हमें अपने मरण का...

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सतगुरु पैराडाइस में जिन मंदिर निर्माण का शिलान्यासः मुनिराज ससंघ के सानिध्य में

श्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य श्री आदित्य सागरजी, अप्रमित सागरजी, आराध्य सागरजी, सहज सागरजी एवं क्षुल्लक श्रेयस सागरजी ससंघ के सानिध्य में सर्वाेदय पार्श्वनाथ...

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दीक्षा संस्कार देखने का अवसर 52 जिनालय निर्माण का मानस बनाया: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी मंगल देशना

सिद्धचक्र मंडल विधान के पूजन अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना प्रकट की। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान क्रियाएं हो रही हैं। जैनत्व के संस्कार...

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नसियाजी में भक्तामर महामंडल विधान का आज दूसरा दिनः वैराग्य की प्रथम सीढ़ी चढ़ रहे है-मुनिश्री आदित्य सागरजी

मुनिश्री आदित्य सागरजी ससंघ सानिध्य में श्री भक्तामर महामंडल विधान अर्चना के तीन दिवसीय आयोजन का आज दूसरा दिन प्रातः 06.30 से प्रारम्भ हुआ। श्री भक्तांबर...

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’मन‘ की स्थिति बड़ी विचित्र है, क्षणभर में हम रुष्ट हो जाते है, क्षणभर में ही खुश हो जाते है- मुनिश्री प्रमाण सागरजी : मुनिश्री ससंघ रामचंद्र नगर में विराजमान

आज रामचंद्र नगर स्थित आदिनाथ बाग में पुज्य मुनिश्री प्रमाण सागरजी अपनी मंगल देशना में कहा कि ’होकर सुख में मग्न न फूले, दुःख में कभी न घबरावे, इष्ट वियोग और...

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भ्रम दूर होगा तभी जीवन का उद्धार होगाः मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज

श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में सज्जन-दुर्जन कई प्रकार के जीव रहते हैं। वे एक-दूसरे की...

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आत्मा में निर्मल गुणों के समीचीन ज्ञान प्रकट करने की क्षमता और दृढ़ता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना

सम्यक ज्ञान समीचीन ज्ञान है। समीचीन ज्ञान स्वाध्याय तप संयम के माध्यम से अपनी शक्ति सामर्थ्य को प्रकट करें। इससे सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र प्राप्त होता है।...

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देव शास्त्र गुरु धर्म का समागम प्राप्त कर उनके प्रति श्रद्धा बनाकर धर्म की वृद्धि करें: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना 

आप बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं, लेकिन तीन खंड वास्तविक मकान को आप भूल रहे हैं। पहला खंड हमारी आत्मा, दूसरा खंड शरीर, और तीसरा खंड मन। इसमें आत्मा प्रथम खंड...

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दुनिया में कोई दुख नहीं होता तो भक्त व भगवान नहीं होते: मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने दिए प्रवचन 

दुनिया में यदि दुःख नही होता तो भक्त और भगवान नही होते। तुम्हारी जिंदगी में दुःख है इसलिए तुम्हारी जिंदगी में मां-बाप है। जहां-जहां मां शब्द लगा हुआ है। उसका...

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