Tag - मंगल देशना

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मनुष्य जीवन में धार्मिक कार्य श्री जी के दर्शन से पुण्य अर्जित करें : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी मंगल देशना

गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चन्द्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चंद्रप्रभ जिनालय में 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना...

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धार्मिक शिविर से जीवन में धर्म संस्कार का होता है ज्ञान प्राप्त : सभी विषयों के सफल प्रतिभागियों के नाम की घोषणा की

धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर में सभी उम्र के भक्तों द्वारा भाग लेना धर्म के प्रति रुझान दर्शाता है।धार्मिक शिविर में धर्म का कैसे संवर्धन हो,संस्कृति और संस्कार...

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भगवान के जन्म तप कल्याणक पर दीक्षित हुईं मनोरमा जैन: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा में दी दीक्षा

दीक्षा का अर्थ है, इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना। दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना। विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं...

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जबलपुर जैन समाज का प्रेरणादायक ऐतिहासिक निर्णय : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने समाज को धर्म संस्कृति सुरक्षा की सीख दी 

जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय समाज हित में लिए गए। इंदौर से पढ़िए, यह...

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श्रावकों का जीवन मन, वचन और काय के संयम से सफल : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में संलेखना का धार्मिक पक्ष बताया 

अनंतानंत भव्य आत्माये इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी ने भी समीचीन धर्म मार्ग हमें बतलाया है। 20वीं सदी में अनेक दिगंबर साधुओं ने...

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भगवान को पूजना सरल है, लेकिन भगवान की मानना कठिन है : मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने दी मंगल देशना 

भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के...

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पंच कल्याणक महा महोत्सव इससे होती है पुण्य की प्राप्ति : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बोली में मुनियों की जन्म स्थली को पुण्यधरा बताया 

पंच कल्याणक प्रतिष्ठा सामान्य कार्यक्रम नहीं होकर महा महोत्सव होता है। जिसमें नर को नारायण, पाषाण को भगवान बनाया जाता है। पंचकल्याणक कार्यक्रम से संस्कार...

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संयम उपकरण पिच्छी जिन मुद्रा और अहिंसा करुणा का प्रतीक: पिच्छी परिवर्तन समारोह में भक्ति का अलौकिक संगम दिखा 

 दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पिच्छी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है। पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं। इनके बिना अहिंसा मय...

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आर्यिका शिरोमणि गुरु मां विद्यान्तश्री के दिव्य अवतरण दिवस पर श्रावक समाज में उमड़ा भक्ति भाव : गुरु मां विद्यान्तश्री के दिव्य आभामंडल और अद्वितीय चर्या को नमन — समाज ने किया अवतरण दिवस मनाने का आह्वान

परम तपस्विनी एवं जैन धर्म की आलोकमयी साध्वी आर्यिका विद्यान्तश्री गुरु मां का अवतरण दिवस आगमसम्मत एवं दिव्य भक्ति भाव से मनाए जाने का समाज से आह्वान किया गया...

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संयम, त्याग, संन्यास के मार्ग पर चलना है तो राग द्वेष छोड़े: आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने पथरिया में भक्तों को संयम, त्याग को अपनाने की दी सीख 

आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि संयम, त्याग, संन्यास के मार्ग पर चलना है, तो राग और द्वेष को छोड़ना चाहिए। यदि आप अपनों से भी राग करोगे और दूसरों से द्वेष...

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