Tag - मंगल देशना

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देव शास्त्र गुरु धर्म का समागम प्राप्त कर उनके प्रति श्रद्धा बनाकर धर्म की वृद्धि करें: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना 

आप बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं, लेकिन तीन खंड वास्तविक मकान को आप भूल रहे हैं। पहला खंड हमारी आत्मा, दूसरा खंड शरीर, और तीसरा खंड मन। इसमें आत्मा प्रथम खंड...

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दुनिया में कोई दुख नहीं होता तो भक्त व भगवान नहीं होते: मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने दिए प्रवचन 

दुनिया में यदि दुःख नही होता तो भक्त और भगवान नही होते। तुम्हारी जिंदगी में दुःख है इसलिए तुम्हारी जिंदगी में मां-बाप है। जहां-जहां मां शब्द लगा हुआ है। उसका...

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