Tag - प्रवचन

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चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : आत्मा की आलोचना करके आप शत प्रतिशत पापों की निर्जरा कर सकते हैं -विज्ञानमति माताजी

उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...

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कमाने का आनंद बहुत कम है: लुटने का दर्द ज्यादा हो रहा – मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज

दुनिया में हर व्यक्ति के मन में 24 घंटे अमंगल का भाव हो रहा है। कमाने का आनंद बहुत कम है लुटने का दर्द ज्यादा है। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट… आगरा।...

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31 वां पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह सम्पन्न : वर्षायोग साधुओं- श्रावकों दोनों का होता है-आचार्य ज्ञानभूषण महाराज

वर्षायोग केवल श्रमणों का नहीं होता है, श्रावकों का भी होता है। जहां पर गुरुओं की वाणी से उनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आता है। वर्षा योग की सार्थकता तभी है जब...

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चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : अच्छे भावों का छाता तंत्र मंत्र के कुप्रभाव को भी रोकता है -विज्ञानमति माताजी

उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : पुण्य को ठुकराकर जो आता है उसकी कथा पुराण बन जाती है – मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे।...

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चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : कंठ में विद्या और गांठ में पैसा समय पर काम आता है -विज्ञानमति माताजी

उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : जैनी सदा पापियों के लिए अपशुकन है – मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना...

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आचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने धर्मसभा में कहा : धर्म, समाज, संस्कृति, परिवार की उन्नति के लिए पुरुषार्थ करें

दिगम्बराचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने शनिवार को धर्मसभा में प्रवचन देते हुए हुए कहा कि कार्य करने का अधिकारी वही होता है जो लगनशील, धैर्यवान, शक्तिशाली तथा...

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चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा को किया संबोधित :  महान बनना तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की...

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चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा : अहिंसा धर्म ही सर्व श्रेष्ठ है – आचार्य विशुद्धसागर महाराज

दिगम्बराचार्य पूज्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में सम्बोधन करते हुए कहा कि अहिंसा-धर्म ही सर्व-श्रेष्ठ है, जीव रक्षा से बढ़कर अन्य कोई धर्म नहीं...

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