Tag - प्रवचन

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सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन : विश्वशांति महायज्ञ विश्व में शांति के लिए सभी इंद्र-इंद्राणियों ने दी पूर्ण आहुति

श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जयपुर हाउस कॉलोनी में सोमवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के आठवें दिन श्री आदिनाथ भगवान जी का...

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गुरु पूर्णिमा पर कहा धर्म सभा में : गुरु भक्ति विनय, विवेक से करने से वैभव, बुद्धि, यश, संपत्ति और मुक्ति मिलती है – आचार्य श्री वर्धमान सागर

शिष्य का गुरु के प्रति समर्पण होना चाहिए। इंद्र भूति ने दीक्षा धारण की और वह गणधर बने। गुरु से अज्ञान दूर होता है,जीवन का कल्याण होता है। यह मंगल देशना आचार्य...

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श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय में धर्मसभा : जैन समाज के सभी गुट अहम- वहम को दूर कर एक हो जाएं -आचार्य विहर्षसागरजी

वर्तमान समय में समाज की एकजुटता आवश्यक है और समय की भी यही मांग है। यह उद्गार शनिवार को श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में राष्ट्रसंत आचार्य श्री...

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अष्टाहिंका महापर्व का छठा दिन : कर्म काटने वाला बड़ा होता है – आचार्य श्री प्रमुख सागर

स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधित करते...

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अष्टाहिंका महापर्व का पांचवा दिन : पुण्य बढ़ाओ, सब कुछ पाओ – आचार्य श्री प्रमुख सागर

स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पांचवे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधित...

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विहर्षसागरजी महाराज ने सिद्धचक्र महामंडल विधान पूजन में किया भक्तों को संबोधित : संतवाद , संघवाद और पंथवाद छोड़ो सभी संघों के संतों से नाता जोड़ो

वर्तमान में संतवाद, पंथवाद और संघवाद छोड़ो और समान रूप से सभी संघों के आचार्य, उपाध्याय और साधुओं से नाता जोड़ो एवं उनकी विनय पूर्वक भक्ति करो। यह उद्गार...

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अष्टाहिंका महापर्व का चौथा दिन : शिकायत मत करो धन्यवाद करो – आचार्य श्री प्रमुख सागर

स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधित...

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सर्व ऋतु विलास मंदिर में विराजित में हैं आचार्य श्री : केवल ज्ञान रूपी लक्ष्मी संसार की अनमोल सर्वोपरि लक्ष्मी है – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि केवलज्ञानी परमात्मा के द्वारा जो धर्म हमें प्राप्त हुआ है, उसकी आराधना, भक्ति, स्तुति स्तवन से जो पुण्य...

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अष्टाहिंका महापर्व का तीसरा दिन : अहंकार नरक का द्वार है – आचार्य प्रमुख सागर

स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधन...

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प्रीति देव, शास्त्र, गुरु, धर्म से करें परिजनों जैसी प्रीति : पुण्य से सब कार्य सिद्ध होते हैं – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी को जैसे लौकिक परिजनों से प्रीति होती है, ठीक वैसी प्रीति देव, शास्त्र...

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