Tag - धर्मसभा

दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -159 विवेकशील, विनम्र और आत्मानुशासित लोग समाज को चाहिए : अहंकारजन्य ज्ञान व्यक्ति को कहीं का नहीं छोड़ता

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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दोहों का रहस्य -158 कभी किसी को कमतर न आंके : पहले स्वयं को जानो, फिर दूसरों को समझाओ

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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त्याग, तप और तपस्या की प्रेरणास्रोत हैं आर्यिका पूर्णमति माताजी : जिनवाणी के स्वर में बहती है आत्मा की पुकार

आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी का जीवन जैन समाज ही नहीं, सम्पूर्ण भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के लिए आदर्श है। वे बताती हैं कि धर्म केवल व्रत और विधान का नाम नहीं...

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दोहों का रहस्य -157 जहां लोभ हो, वहां ईश्वर नहीं बसता : लोभ और भक्ति एक साथ नहीं टिक सकते

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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दोहों का रहस्य -156 सच्चा साधक वही है जो अपने अस्तित्व को प्रभु के चरणों में पूर्णतः समर्पित कर दे : निष्काम भक्ति मनुष्य को सच्चे सुख की ओर ले जाती है

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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दोहों का रहस्य -155 दिल को सच्चाई से जोड़ने में ही सुकून है : ईश्वर को प्राप्त करने से ही आती है जीवन में निश्चिंतता

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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युगल मुनिराजों के सानिध्य में सनावद में हुई मंगल कलश स्थापना : मुनि श्री साध्य सागर जी के निर्देशन में मंत्र जाप अनुष्ठान संपन्न

सनावद नगर के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में विराजित मुनिश्री विश्व सूर्य सागर जी एवं मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में वर्षायोग हेतु...

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अतिशय क्षेत्र बना श्रद्धा, सेवा और स्वावलंबन का संगम : 700 गिर गायों की शांति धारा योजना और विशाल प्रतिमाएं क्षेत्र को बनाती हैं विशेष

जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...

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व्यसन करने वाला धार्मिक अनुष्ठान करने का पात्र नहीं : मुनिश्री विलोकसागर’जी ने व्यसनों को त्यागने का दिया उपदेश

व्यसन करने वाले को सभी जगह हेय दृष्टि से देखा जाता है, ऐसा व्यक्ति सर्वत्र निंदा का पात्र बनता है। यह उद्गार मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर में...

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पुरुषार्थ कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाएं: मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज ने दी धर्म देशना 

स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों के प्रवचन जन-जन के हितकारी हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन हो रहे प्रवचनों का स्थानीय समाजजनों के अलावा बाहर से...

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