जयपुर में विराजित आचार्य वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि जीव का शरीर उसके कर्मों के अनुसार बनता है। विभिन्न मंदिरों के दर्शन और स्वाध्याय के बीच...
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मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में सिद्धांत ग्रंथ ‘समयसार’ की व्याख्या करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मन की स्थिति को अनुकूल रखना भी एक...
मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...
रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को...
भिंड में पर्यूषण पर्व के अवसर पर मेडिटेशन गुरु बिहसंत सागर जी के सानिध्य में बद्रीप्रसाद की बगिया में मैना सुंदरी नाटक का आयोजन किया गया। इस नाटक में धर्म...








