Tag - आत्मजागरण

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श्रुत पंचमी ज्ञान और आत्मजागरण का महापर्व : आचार्यश्री निर्भयसागर जी ने श्रुत पंचमी महापर्व का महत्व बताया

आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने छीपीटोला स्थित जैन भवन में श्रुत पंचमी महापर्व की पूर्व बेला पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रुत पंचमी जैन समाज...

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श्रुत पंचमी जिनवाणी का अनंत आलोक और श्रुत-परंपरा का अक्षय महोत्सव : ज्ञान की अविरल गंगा, आचार्यों की अमर साधना और आत्मजागरण का महापर्व

जब संसार का समस्त वैभव काल की धूल में विलीन हो जाता है, जब राजसत्ताएँ, साम्राज्य और सभ्यताएँ इतिहास के पृष्ठों में सिमट जाती हैं, तब भी यदि कुछ अमर रहता है तो...

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साधु संतों के पदविहार में आवश्यक सावधानी श्रावकों के कर्तव्य : पद विहार होती है आत्मजागरण, धर्मप्रभावना और लोकमंगल की पवित्र यात्रा

भारतीय संस्कृति की आत्मा यदि किसी में स्पंदित होती दिखाई देती है, तो वह तपस्वी संतों के चरणों में ही दिखाई देती है। त्याग, संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि की दिव्य...

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धर्म भय का नाम नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है : ‎ ‎धर्म तो वह पवित्र चेतना है, जो मनुष्य को उसके भीतर के सत्य से परिचित कराती है

जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। ‎यह...

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मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज बोले – “रोटी साधु के पीछे घूम रही है, मनुष्य को अपनी सोच बदलनी होगी : दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि श्री के प्रवचनों से गूंजी आत्मजागरण की भावना

दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रही प्रवचनमालाओं में आज उन्होंने जीवन की गूढ़ सच्चाइयों पर प्रकाश डाला। मुनि...

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पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में सम्पन्न : मोक्षकल्याणक, पिच्छिका परिवर्तन और वात्सल्यमना उपाधि से गूंजा रामगंजमंडी

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव अत्यंत भव्यता से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मोक्षकल्याणक महोत्सव, पिच्छिका...

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