Tag - Vasupujya Jinalaya

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निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया : त्याग और तपस्या का त्योहार है दीपावली – आर्यिका श्री विभाश्री माताजी

वासुपूज्य जिनालय में आर्यिका श्री विभाश्री माताजी ने कहा कि बाहर की साफ सफाई के साथ अन्दर की सफाई का प्रयास इस दिन होना चाहिये, तभी दीपावली पर्व मनाने की...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : धर्म तत्त्व को जीवन में अंगीकार करने से ही उन्नति का मार्ग मिलता है- आर्यिका विभाश्री

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि हमारे परिणामों में इतनी शांति होनी चाहिये कि कितना भी क्रोधी व्यक्ति हमारे आभामण्डल में आ जाये तो वह भी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : कर्तव्यों का सम्यक निवर्हन ही सच्चा धर्म है- आर्यिका विभाश्री

श्री दिगम्बर जैन वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में जैन संत गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से धर्म का निर्वाह...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : संसार में भगवान की भक्ति से बढ़कर कोई दूसरी कल्याणकारी वस्तु नहीं है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु की आराधना, संतों की संगति, जिनवाणी का श्रवण, हमारे जीवन की दशा और...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : इच्छा और तृष्णा से बचने की एक मात्र औषधि है संतोष – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि छोटे को देखकर जिओ क्योंकि छोटे को देखकर जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : महत्वाकांक्षा की कीमत पर मनुष्यता सदैव हारी है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति दुःख से ग्रसित है और उसके दुःख का कारण उसकी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : अच्छी संगति रखने से व्यक्तित्व निखर जाता है- आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गलत स्थान पर पहुंच कर भी अपने मन को संभाल कर रखना बहुत कठिन होता है।...

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आर्यिका विभाश्री माताजी ने वाणी संयम के बारे में बताया : अपनी वाणी से हित-मित-प्रिय वचन बोलना चाहिए

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने शौक के लिये किसी को शोक में नहीं डालना चाहिए। हम अपने शौक के लिए जीव जन्तुओं की हिंसा करते हैं ।...

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आर्यिका विभाश्री का चातुर्मासिक प्रवचन : जीवन के कर्मो का फल सबको भोगना है 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि अपने अंदर खोजना है कि कैसे हमारी आत्मा बुरे परिणामों को कर हमें दुखी...

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आर्यिका विभाश्री माताजी के चातुर्मासिक प्रवचन : प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक जीव के अपनी-अपनी कषायों के कारण अनन्त प्रकार के परिणाम हो सकते...

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