Tag - Spiritual Discourse

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विश्व में शांति हेतु क्षमा धर्म अपनाने की आवश्यकता : पर्यूषण पर्व के अवसर पर सामूहिक क्षमा याचना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रम।

अंबाह में जैन बगीची में आयोजित क्षमावाणी महोत्सव में पूर्व विधायक सत्य प्रकाश सखवार ने उपस्थित लोगों को क्षमा धर्म अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में सामूहिक...

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दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन : इच्छाओं को रोकना ही सच्चा तप है – आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज

रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को...

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दशलक्षण महापर्व का सातवाँ दिन – उत्तम तप का संदेश : आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का प्रवचन

तरुणसागरम तीर्थ, कोडरमा में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महामुनिराज ने उपस्थित गुरु-भक्तों को उत्तम तप धर्म का संदेश...

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शौच धर्म पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रेरक प्रवचन: लोभ त्याग ही सच्चा शौच धर्म है 

विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास जारी है। धर्मसभा में उन्होंने कहा कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी...

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संत समागम से जीवन निर्मल और धर्म का मार्ग प्राप्त होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म और स्वाध्याय का महत्व समझाया

धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संत समागम, स्वाध्याय, अभिषेक पूजन और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जीवन निर्मल होने, सम्यक दर्शन प्राप्त...

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विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन में दी मन की सफाई की सीख : बोले-काम बिगड़ता है जब मन बिगड़ता है 

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने रविवार को मंगल प्रवचन में कहा कि जीवन की सारी समस्याएँ मन से जुड़ी हैं। जब मन बिगड़ता है तो काम भी...

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सहारनपुर में 30 पीछीधारी संतों का दुर्लभ सानिध्य : आपका अभिमान बताता है, आप गुणवान नहीं हैं – आचार्य विमर्शसागर जी

सहारनपुर में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने छोटे-से गुणों पर अभिमान करता है तो वह वास्तविक गुणवान...

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मन और वचन में अंतर तिर्यंच गति का कारण है : मायाचारी से बचना जरूरी है – आचार्य विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना...

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मूर्छा भाव व्यक्ति को नियम संयम से दूर करता है : मनुष्य जन्म को साधना और धर्म से सार्थक करें – आचार्य श्री

आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने रामगंजमंडी में प्रवचन देते हुए कहा कि मोह और मूर्छा भाव के कारण मनुष्य धर्म और संयम से भटक जाता है। मनुष्य जन्म को धर्म...

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सुख-दुख जीवन का हिस्सा, प्रतिकार से बचें – प्रवचन में मुनि श्री का संदेश : जीवन में घट रही हर घटना को स्वीकारें – मुनि प्रमाण सागर

भोपाल के अवधपुरी स्थित प्रवचन मंच से मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी घट रहा है उसे सहजता से स्वीकार करें। प्रतिकार, वहिष्कार या सत्कार –...

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