Tag - Lalitpur

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दशलक्षण महापर्व के समापन पर निकली श्रीजी विमान शोभायात्रा : विश्वशांति के लिए क्षमा धर्म अपनाने की आवश्यकता – आर्यिका रत्न

जैन धर्मावलंबियों के दस दिवसीय आत्म शुद्धि के पर्व पर्युषण का हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर मंदिरों में भगवान जिनेंद्र के अभिषेक के साथ दशलक्षण धर्म...

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पाठशाला के नन्हें-मुन्हें बच्चों ने प्रस्तुत की शिक्षाप्रद नाटिका : परिग्रह का त्याग करना आकिंचन्य धर्म- मुनिश्री अक्षय सागर 

धर्म नगरी वर्णीनगर मड़ावरा में संत शिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के शिष्य एवं नवाचार्य श्री समयसागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य विद्यासागर...

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उत्तम आकिंचन्य धर्म पर दिए प्रवचन : पाप करने के लिए धर्म को बीच में मत लाना- मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

जब जब हमें अच्छेपन की फीलिंग हो कि मुझे अब कोई दुख नहीं है, समझ लेना तुम्हारे बहुत जल्दी दुख आने वाला है। मेरा परिवार बहुत अच्छा है कोई परेशानी नहीं, बस सब...

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आदिनाथ जैन बड़ा मंदिर में हुई 1008 दीपों से बडे़ बाबा की महाआरती : संकल्प विकल्प की परिणति का त्याग ही आकिंचन- अविचल सागर

 पर्युषण पर्व के नवें दिन अभिनंदनोदय तीर्थ में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री अविचल सागर महाराज ने कहा संकल्प विकल्प की परिणति का त्याग ही आकिंचन धर्म...

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पर्यूषण पर्व में गौ उपचार एवं पशु चिकित्सालय के लिए संकल्पित हुए श्रेष्ठीजन : त्याग ही जीवन में मुक्ति का द्वार, जिससे ही मिलती आत्मशान्ति- मुनि श्री अविचल सागर महाराज 

पर्युषण पर्व पर अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री अविचल सागर महाराज ने कहा कि त्याग के माध्यम से जीवन में आत्मशान्ति मिलती है।...

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उत्तम त्याग कहो जग सारा, औषध,शास्त्र अभय आहारा : त्याग से ही व्यक्ति बनता है महान -मुनिश्री अक्षय सागर 

      त्याग की भावना जैन धर्म में सबसे अधिक है क्योंकि जैन संत सिर्फ घर,द्वार ही नहीं यहां तक कि अपने कपडों का भी त्याग कर देते हैं और सम्पूर्ण जीवनभर दिगंबर...

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जैन मंदिरों में गूजे जयकारे, प्रभावना पूर्वक हो रहे धार्मिक आयोजन : इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी तपस्या – अविचल सागर महाराज

तपने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह अपनी आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार एवं परिणामों में निर्मलता आती है। उक्त विचार मुनि...

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सुगंध दशमी का पर्व मनाया : आत्मा की विशुद्धि का पर्व है दशलक्षण महापर्व – आर्यिका रत्न धारणामति

दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को...

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सुगंध दशमी पर श्रावकों ने जैन मंदिरों में की धूप विसर्जित : संयम की आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना – अविचल सागर

संयमी व्यक्ति का जीवन संयत और निर्मल बताते हुए मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा जिनको हम मन से निषिद्ध कर देते हैं और मन पर हावी नहीं होने देते संयम की प्रथम...

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जैन मंदिरों में धार्मिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों का उत्साहपूर्वक प्रदर्शन : सत्य पर सारे तप निर्भर हैं, इससे ही पवित्र होती है वाणी – मुनि श्री अविचल सागर महाराज

सत्य ही जीवन का यथार्थ है जिस पल तुम अपने इस सत्य को जान लोगे तो तुम्हारा सारा भय समाप्त हो जाएगा। सत्य को जानते हुए भी असत्य में जीते हैं यदि जीते जी तुमने...

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