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हिंदी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ या अंग्रेजी भाषा में लिख सकते हैं पत्र : प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के आचार्य पद प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत पत्र लेखन प्रतियोगिता

 प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठा महोत्सव (वर्ष 2024-2025) के अंतर्गत आयोजित पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस...

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श्री दिगंबर जैन परवार समाज कोर ग्रुप की बैठक सम्पन्न : विभिन्न आवश्यक मुद्दों पर किया गया विचार 

 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) के श्री विधासागर हाल, मालवीय रोड, रायपुर में श्री दिगंबर जैन परवार समाज के कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक...

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आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज देंगे दीक्षा : जैनेश्वरी दीक्षार्थियों की भव्य गोद भराई सम्पन्न

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के करकमलों से सिरसाड़, मुंबई में 2 मार्च 2025 को दीक्षित होने वाले चार ब्रह्मचारी भैया जी की गोद भराई का कार्यक्रम श्री...

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धर्म सभा में दिए प्रवचन : समयसार का प्रैक्टिकल है पूजा के आठों अंग- मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

जो वस्तु जिस रूप में होती है, वह सदा शक्तिहीन को अपने पक्ष में करने का प्रयास करती है। यदि हमारा उपादान कमजोर है, तो निमित्त हमेशा उसे अपने अनुसार चला लेगा।...

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आचार्य वर्धमान सागर की शिष्या आर्यिका श्री तपनमति जी ने धारण की यम संल्लेखना : सभी प्रकार के आहार का किया त्याग

आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर...

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गुरुभक्तों से अपील, नवनीत जैन की सहायता के लिए आगे आएं : एकजुट प्रयासों से संकट से उबारने का करें प्रयास

 धर्म और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा हमारा कर्तव्य है। जब धर्म के अनुयायियों को सहायता की आवश्यकता हो, तो हमें आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और...

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मनुष्य भव में करें क्रोधाग्नि, कामाग्नि और जठराग्नि से मुक्त होने का प्रयास : श्रमण निरंतर अपनी साधना, त्याग और तपस्या से बुझाते हैं इन अग्नियों को

संसार में फंसा मनुष्य क्रोधाग्नि, जठराग्नि के वशीभूत होकर भवभ्रमण करता है और अति संक्लेशों से मरकर नरकादि में गिर जाता है। यह मनुष्य भव और जिनधर्म असीम...

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जैन ग्रंथों का चार अनुयोग में विभाजन : धार्मिक शिक्षाओं का गहन अध्ययन अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

जैन धर्म के चार अनुयोग के माध्यम से हमें जीवन के उच्चतम उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक सिद्धांतों का ज्ञान मिलता है। ये शास्त्र न केवल हमें जीवन के...

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आर्यिका ज्योति मति माताजी का सम्यक समाधिमरण : दो माह में किए 30 से ज्यादा उपवास

पारसोला कस्बे में वात्सल्य वारिधि दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की यम संल्लेखनारत शिष्या, आर्यिका ज्योति मति माताजी का सम्यक समाधिमरण 16 दिसंबर...

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1151 वर्ष पुरानी वासुपूज्य भगवान की प्रतिमा स्थापित है इस मंदिर में : डिजिटल तकनीक का उपयोग करके इस प्रतिमा का मूल स्वरूप किया प्रस्तुत

 श्री 1008 वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर भूधर तीर्थ श्रीकेशरियाजी से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर मूलनायक श्री 1008 वासुपूज्य भगवान की अत्यंत...

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