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समयसार का अध्ययन आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है : आर्यिका रत्न 105 श्री संगममती माताजी

अंबाह के परेड दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आर्यिका रत्न 105 श्री संगममती माताजी ने समयसार ग्रंथ के माध्यम से आत्मा के शुद्ध स्वरूप, समता, आत्मचिंतन...

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