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ईर्ष्या मनुष्य के चरित्र में लाभ की जगह हानि का बीज बोती है : आर्यिका विभाश्री ने ईर्ष्या भाव के बारे में बताया 

व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणों को ग्रहण नहीं करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता है...

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भगवान की भक्ति, आराधना एवं विशुद्ध आचरण से दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु भी सुलभता से प्राप्त हो जाती है : आर्यिका विभाश्री ने प्रभु की भक्ति की महिमा का किया बखान 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन के माध्यम से प्रभु की भक्ति की महिमा का व्याख्यान किया | जब मेरा मन और तन पवित्र...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : धर्म तत्त्व को जीवन में अंगीकार करने से ही उन्नति का मार्ग मिलता है- आर्यिका विभाश्री

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि हमारे परिणामों में इतनी शांति होनी चाहिये कि कितना भी क्रोधी व्यक्ति हमारे आभामण्डल में आ जाये तो वह भी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : किसी के उपकार को मानना हमारे बड़प्पन का द्योतक है – आर्यिका विभाश्री 

 आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि जब कोई किसी के उपकार को मानता है तो वो जीवन में बहुत ऊचाइयों को प्राप्त कर लेता है, चाहे वह गुरुओं का उपकार...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : कर्तव्यों का सम्यक निवर्हन ही सच्चा धर्म है- आर्यिका विभाश्री

श्री दिगम्बर जैन वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में जैन संत गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से धर्म का निर्वाह...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : संसार में भगवान की भक्ति से बढ़कर कोई दूसरी कल्याणकारी वस्तु नहीं है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु की आराधना, संतों की संगति, जिनवाणी का श्रवण, हमारे जीवन की दशा और...

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कर्तव्यों का सम्यक निवर्हन ही सच्चा धर्म है : आर्यिका विभाश्री ने दिया कर्तव्य और निष्ठा के बारे में बताया 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि कर्तव्यों का पालन करने से धर्म का निर्वाह स्वयं हो जायेगा, क्योंकि...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : इच्छा और तृष्णा से बचने की एक मात्र औषधि है संतोष – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि छोटे को देखकर जिओ क्योंकि छोटे को देखकर जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : महत्वाकांक्षा की कीमत पर मनुष्यता सदैव हारी है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज के समय में हर व्यक्ति दुःख से ग्रसित है और उसके दुःख का कारण उसकी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : अच्छी संगति रखने से व्यक्तित्व निखर जाता है- आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि गलत स्थान पर पहुंच कर भी अपने मन को संभाल कर रखना बहुत कठिन होता है।...

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