प्रत्येक मनुष्य के मन में एक प्रश्न रहता है कि भगवान से कुछ मांगना चाहिए या नहीं मांगना चाहिए। इस संबंध में जिनागम तो सीधा सा उत्तर देता है कि क्या सूर्य से...
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जैन मिलन शाखा जौरा का शपथ ग्रहण समारोह हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। समारोह के मध्य मेधावी बच्चों को सम्मानित भी किया गया। जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश...
जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम आचार्यश्री के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। वाक्केशरी आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराजा ससंघ का...
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में मुनिपुगंव श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कषाय करना, क्रोध किसके...
शास्त्रों में भी अनेकों उदाहरण मिलते हैं कि समय-समय पर अन्य संप्रदाय के लोगों ने भी दिगम्बर साधुओं की सुरक्षा की है। आज भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में एक...
जैनाचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज ने धर्मसभा को किया संबोधित : बिना योजना के जीवन सुखी नहीं हो सकता
किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक संचालन के लिए योजना बनाई जाती है । बिना योजना बनाए किसी भी कार्य को करना सफलता की गारंटी नहीं हैं । कहने का तात्पर्य यह हैं कि...
चातुर्मास में कलश वह माध्यम है, जिससे श्रावक अपने आपको चातुर्मास से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यह विचार आचार्य श्रीविनिश्चयसागर जी महाराज ने चातुर्मास कलश...
जो आज तक किया है अब नहीं करेंगे और जो नहीं किया है वो अब करेंगे। ऐसी विचारधारा जब आपकी अंतस चेतना में आयेगी, तब आप कुछ सुखी हो सकते हैं। उक्त उद्बोधन आचार्य...
चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में प्रवचन : मनुष्य पर्याय चिंतामणि रत्न के समान हैं -आचार्य विनिश्चयसागर
मनुष्य पर्याय से बढ़कर कोई सौभाग्य नहीं हैं, ये सबसे बड़ा सौभाग्य हैं जो आपको प्राप्त हुआ है। आप इसे महसूस करें तभी आप मानव पर्याय की महत्त्वता समझ सकेंगे।...
अगर संसारी माताएं भी पूरी मां बनना चाहती हैं तो वह अपने बच्चों के केवल शरीर का ही पालन पोषण न करें बल्कि उनकी आत्मा को भी संस्कार प्रदान करें, अपने बच्चों को...








