Tag - प्रवचन

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : लक्ष्मी का नहीं सरस्वती का उपासक बनो – आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज

आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति धन से महान होता है या धन के त्याग से महान होता है। अर्थ जीवन को व्यर्थ भी कर सकता है और अर्थ जीवन को समर्थ भी...

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जैन मिलन स्वतंत्र की ओर से आयोजन : गरीब बच्चों को वितरित की गई जरूरत की सामग्री

जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय पठर्रा डबरा से लगभग 9 किलोमीटर दूरी पर निर्धन गरीब छात्र एवं छात्राओं को जरूरतमंद स्टेशनरी पाठ्य सामग्री...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समझाया भक्तामर के 18वें काव्य का महत्व

मुनि श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि हमें कभी भी किसी की पड़ी हुई, रखी हुई वस्तु को नहीं उठाना चाहिए क्योंकि जैन आगम में आचार्य भगवंत ने कहा है कि आचौर्य...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : हमारा भारत कर्म प्रधान देश है – अचार्य प्रमुख सागर महाराज

 कर्म गहन विधान पूजन हमारे जीवन को महान बनाता है। हमारे जीवन में 148 कर्म की प्रकृतियां हैं, वही हमारे शरीर का निर्माण करती हैं, वही हमें सुख- दुख और चारों...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन उपासना: समर्पण एवं भावना से आराधना की उत्पत्ति होती है – आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जो अपने परिवार के साथ भगवान की पूजा करते हैं, वे तीर्थंकर के कुलों में उत्पन्न होते हैं...

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नारी के उत्थान पर बोले उपाध्याय श्री विहसंतसागर महाराज : नारी का उत्थान तो भगवान ऋषभदेव के समय से चला आ रहा है

आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो- आर्यिका विज्ञानमति माताजी

आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं...

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प्रवचन के माध्यम से बताया आहारदान का महत्व : बरसात, हवा, कर्म और साधु कब आ जाए, पता नहीं – मुनिश्री सुधासागर

जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : अहंकार और आलस्य पतन का भाव उत्पन्न करते है – आर्यिका विभाश्री

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा के शांत समुंद्र में जो राग-द्वेष रूपी लहरें उठती हैं, यही हमारे...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है- आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज

आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज अपने चातुर्मासिक प्रवास के दौरान श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम किसी से ईर्ष्या करते हैं, किसी का बुरा सोचते हैं, तो...

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