Tag - दिगंबर जैन

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सम्यक ज्ञान है द्रव्य जैसा है उसे वैसा ही समझें : आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी के सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी जारी

आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी हो रही है। इसमें देशभर के विद्वत भाग लेंगे। यह संगोष्ठी 1 और 2 अक्टूबर को होगी। मंगलवार...

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दीक्षार्थी अवनीश भाई की अनुमोदना कर गोद भराई की रस्म की : दीक्षार्थी ने गणधर वलय विधान की पूजा की, 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र पाठ का हुआ समापन

धार्मिक णमोकार मंत्र के जाप से पाप नष्ट होते हैं, कर्मों का क्षय होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह मंगल देशना बुधवार को...

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जैन प्रतिभा सम्मान समारोह में समाज जनों का किया अभिनंदन : दशलक्षण तपस्वी बहुमान समारोह में ऊषा जैन एवं अरिहा जैन सम्मानित

संतोष सभागृह में रविवार को प्रतिभा सम्मान समारोह एवं सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम भव्यतापूर्ण तरीके से मनाया गया।दशलक्षण तपस्वी बहुमान समारोह में ऊषा जैन एवं...

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यहां कोई भी कार्य बिना पुरुषार्थ के सफल नहीं होता : मुनि श्री प्रमाणसागर जी के सान्निध्य में होगा सिद्ध चक्र महामंडल विधान

4 से 12 अक्टूबर तक आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में होगा।...

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मुनि श्री पूज्य सागर जी के प्रथम शिक्षा गुरु और व्रत प्रदाता हैं आचार्य श्री : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को प्रतिष्ठित काष्ठ जिनवाणी समर्पित         

मुनि श्री पूज्य सागर जी के प्रथम शिक्षा गुरु और व्रत प्रदाता आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को जिनवाणी माता श्री नमीष जैन, अध्यक्ष पोरवाड़ समाज, इंदौर ने आचार्य...

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10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक मनाया: श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण पाठ कर निर्वाण लाडु चढाए

नगर के सभी जिनालयों में धूमधाम से जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री वर्द्धमान...

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धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ भगवान और आचार्य श्री शांति सागर जी का संयोग बताया 

राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव...

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मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है: त्रि-दिवासीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्वान 

सारा विश्व युद्ध की कगार पर है तब ये संत मानवता के विकास के लिए चिंतन कर रहे हैं। आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगल और प्रकृति को नुकसान पहुंच...

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जैन समाज के विरोध से पशु स्रोत वाले खाद पर रोक: विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने जताया था कड़ा विरोध 

कृषि मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी उस गजट नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है। इसमें पशुओं के चमड़े, मांस और हड्डियों से बने खाद के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। विश्व...

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द्रव्य पूजा की खींचतान में भावपूजा हो रही नष्ट: आचार्य श्री विमर्श सागर जी जैन समाज के विखंडन में मूल कारण अंतरंग भाव पूजा की कमी 

अप्पोदया प्राकृत टीका पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने श्री योगसार प्राकृत संस्कृत ग्रंथ पर एक हजार...

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