गणचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की शिष्या आर्यिका 105 श्री विश्वशांता श्री माताजी का पूज्य गणाचार्य के श्रीमुख से पंच नमस्कार मंत्र एवम् आत्मसंबोधन सुनते...
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मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि हम जिन रास्तों पर चल रहे हैं, वह रास्ते अंजाने हैं। जाने हुए रास्तों पर चलना कोई बड़ी बात नहीं है...
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पिछले दिनों विधानसभा में एक चर्चा के दौरान दिगंबर जैन समुदाय के दिगंबरत्व का मखौल उड़ाते...
18 दिनों से क्षपक राज श्री मेरू भूषण जी ने अन्न जल सहित चारों प्रकार के आहार का त्याग कर, उत्तम समाधि मरण की ओर मार्ग प्रशस्त कर रखा है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू...
अष्टाहिन्का पर्व पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने आठ दिन तक मौन रहकर निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया है। गुरुवार को उनके संकल्प को पांचवा दिन है। पांच...
आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज जी के 55वे संयम वर्ष वर्धन दिवस पर विशेष (संयम दीक्षा दिवस – फागुन कृष्णा 8 अष्टमी, 24 फरवरी 1969) आपका व्यक्तित्व...
अशुद्ध कारण से कभी त्रिकाल में भी शुद्ध कार्य घटित नहीं हो सकता है। बिना कारण के भी कोई कार्य संपन्न नहीं होता और कारण के होते पर भी कार्य हो जाए, यह भी आवश्यक...
लेखक -अंतर्मखी मुनि पूज्य सागर जैन धर्म की कठिन तपस्या का एक अनिवार्य हिस्सा और मूलगुण है केशलोंच। जैन साधु अपने आत्मसौंदर्य को बढ़ाने के लिए...








