Tag - जैन मुनि

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मुनिश्री सारस्वतसागर जी ससंघ का मंगल चातुर्मास नांद्रे में होगा: मंगल अगवानी की तैयारियां जारी

पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के शिष्य छोटे बाबा सारस्वत सागर जी ससंघ का मंगल चातुर्मास नांद्रे में होगा। उनकी मंगल अगवानी 2 जुलाई को श्री भगवान महावीर दिगंबर...

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पद्मश्री बाबूलाल पाटोदी पीढ़ी दर पीढ़ी स्मरणीय हैं: उनके सेवा कार्यों का अवदान समाज चुका नहीं सकता

शहर के बा पद्मश्री बाबूलाल पाटोदी की 15 जून जन्म जयंती है। गोम्मटगिरी पर माल्यार्पण किया गया। रविवार को फादर्स डे भी है। वे असल मायने में पिता ही नहीं पितामह...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : तीन गलतियां बार-बार मत दोहराओ- सर्वार्थ सागर जी महाराज

धर्मसभा में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने जीवन की साधना और आत्म-विकास पर गहन विचार साझा करते हुए कहा कि तीन गलतियां ऐसी हैं जिन्हें हमें बार-बार नहीं...

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दिखा भक्ति, आदर और संस्कार का संगम : दिगंबर जैन समाज की बहन-बेटियों ने प्रस्तुत किया प्रेरणादायक उदाहरण

देवास जिले का छोटा सा नगर हाटपिपलिया इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां दिगंबर जैन समाज की बहन-बेटियों ने एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन...

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बच्चों ने लिया परीक्षा में हिस्सा : जैन मिलन महिला भिंड द्वारा पचासा जैन मंदिर में शिक्षण शिविर का समापन

जैन मिलन क्षेत्रीय पाठशाला समिति की चेयरमैन वीरांगना सपना जैन एवं जैन मिलन महिला भिंड के तत्वावधान में पचासा जैन मंदिर में आयोजित शिक्षण शिविर का आज...

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सच्चे रिश्ते केवल आंखों से नहीं, दिल से देखे जाते: मुनिश्री सर्वार्थसागर जी महाराज ने धर्मसभा में दी ‘रिश्तों की पहचान’ 

मुनिराजों का यहां की नगरी में विराजमान होना ही पुण्य की बात है। यहां के धर्मप्रेमी समाज को आचार्य और मुनिराजों के धर्म देशना में आशीर्वचन सुनने को मिल रहे हैं।...

दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -135 धर्म हमें अहंकार से मुक्त होकर क्षमा और संयम का मार्ग अपनाने की शिक्षा देता है : जो शांति के लिए झुक जाए, वही सच्चा साधु है

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

तीर्थ यात्रा

अतिशय तीर्थ पार्ट 39 प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्वितीय संगम यह तीर्थ क्षेत्र आचार्य विद्यासागर जी महाराज के मार्गदर्शन में हुआ था इस मंदिर का निर्माण

जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक...

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मार्गदर्शक, रक्षक और आध्यात्मिक गुरु भी होता है पिता: प्रकृति का पालक होने के साथ ही धैर्यता की प्रतिमूर्ति 

कहने को सभी धर्मों में पिता को ईश्वर से भी अधिक सम्मान दिया जाता है, क्योंकि वह सृजक है। वह बनाता है और उनके ही इस कर्म से प्रकृति का संतुलन होता है। जैन धर्म...

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जीवन में धर्मध्यान ही पुण्य का कारण : सिद्धचक्र महामंडल विधान में इंद्र इंद्राणियों ने किए अर्घ्य समर्पित

पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर में आचार्य विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनि श्री सौम्यसागर महाराज एवं मुनि श्री जयेंद्र सागर महाराज के सानिध्य एवं आशीर्वाद से...

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