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अनंत चतुर्दशी 17 को, इस बार दुर्लभ संयोग : जैन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व


भाद्र माह शुक्ल पक्ष की अनंत चतुर्दशी वैसे तो अपने अनंत नाम से ही विशेष है। लेकिन इस बार तो इस दिन पंचांग अनुसार भी अनेक ऐसे योग जुड रहे है जो वर्षों में संयोग बन पाते हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार अनंत चतुर्दशी 16 सितंबर सोमवार को दोपहर 03:10 बजे प्रारंभ होगी जो 17 सितंबर मंगलवार को 11:44 बजे तक रहने से 17 सितंबर को मनाई जाएगी। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। भाद्र माह शुक्ल पक्ष की अनंत चतुर्दशी वैसे तो अपने अनंत नाम से ही विशेष है। लेकिन इस बार तो इस दिन पंचांग अनुसार भी अनेक ऐसे योग जुड रहे है जो वर्षों में संयोग बन पाते हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार अनंत चतुर्दशी 16 सितंबर सोमवार को दोपहर 03:10 बजे प्रारंभ होगी जो 17 सितंबर मंगलवार को 11:44 बजे तक रहने से 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इन दोनों दिनों के साथ चतुर्दशी पूर्णिमा युक्त, शतभिषा नक्षत्र कन्या संक्रांति विश्वकर्मा जयंती के भी संयोग में है।

विश्वकर्मा जी ने वास्तु , निर्माण, मशीन, उद्योग से जुड़े लोगों के विकास को उन्नत किया था इसलिए ये अनंत चतुर्दशी इतने सारे संयोग के साथ आने से देश प्रदेश में मशीन, उद्योग निर्माण ,संचार के अनंत द्वार आगे खुलने से आम जनता का उद्योग,तकनीकी क्षेत्र से विकाश होगा और जनता को रोजगार की संभावना है जिससे अनंत सुख फल बढ़ेगा। वहीं जो लोग इस दिन विष्णु जी के लिए व्रत/उपवास करके अनंत कष्टों, पापो को नष्ट करते हैं इस दिन अनंत सूत्र बांधा जाता है जिसमे 14 गांठें होती हैं। जैन धर्मावलंबियों के लिए ये दिन दशलक्षण महापर्व होने से व्रत /उपवास साधना के लिए खास होता है। दश लक्षण महापर्व का आखरी दिन है।

इस दिन जैन लोग अनेक प्रकार से व्रत /उपवास अपनी सामर्थ्य अनुसार कोई एकासन कोई निर्जला रखते हैं और अपनी आत्मा की शुद्धि कर अनंत पुण्य फल अर्जित करते हैं।

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