सारांश
अयोध्यापुरी में शाही पंचकल्याणक महोत्सव में आदिनाथ भगवान कैलाश पर्वत से मोक्ष पधारे। इस अवसर पर विश्व शान्ति महायज्ञ भी हुआ। श्रीजी की भव्य परिक्रमा नगर में आकर्षण का केंद्र रही। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
ललितपुर। शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथादिक एकादश रथोत्सव विश्व शान्ति महायज्ञ रविवार को निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में भव्यता पूर्वक संपन्न। इसमें भगवान आदिनाथ का कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन का दृश्य हजारों लोगों ने अयोध्यापुरी में देखा और श्रीजी के रथोत्सव में श्रद्धा भक्ति पूर्वक सम्मलित होकर पुण्यार्जन किया।
प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक शान्तिधारा के उपरान्त नित्यमह पूजा हुई। वेदी पर ही कैलाश पर्वत की रचना की गई, जिस पर्वत पर आदिनाथ जी ने बैठ कर ध्यानरूढ़ होकर सिद्धत्व प्राप्त किया। मुनि सुधासागर महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय को ध्यान साधना कराई और क्षणभर में ही भगवान आदिनाथ को मोक्ष की प्राप्ति हो गया। इस दृश्य को देखने अपार जनसमूह आतुर था।

मुनि श्री के हुए प्रवचन
इस मौके पर मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि पुण्य के अभाव में कोई काम नहीं आता। जिनके आगे पीछे इन्द्र थे, जन्म पर रत्नवृष्टि हई। सारा वैभव था। जब पुण्य में हीनता आई तो वैराग्य हुआ और कैलाश पर्वत से मोाक्ष गए और कपूर की भाॅति शरीर विलीन हो गया। प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में भगवान आदिनाथ के मोक्ष के पश्चात कैलाश पर्वत पर अग्निकुमार इन्द्रों द्वारा हवन किया गया। इसके उपरान्त विश्व शांति महायज्ञ में इन्द्र- इन्द्राणियों ने पूर्ण आहुति दी। मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव में पाषाण से परमात्मा बनाने की प्रक्रिया होती है। तीर्थंकर आदिनाथ ने कर्मों को नाश कर मोक्ष पद को प्राप्त किया और हमें परमात्मा बनने का मार्ग दिखाया। पंचकल्याण को अपने आचरण में लाने में ही कल्याण है। जिस तरह नशा करने से अघाते नहीं हैं, पाप करने से तृप्ति नहीं होती, उसी तरह धर्म जितना करोगे, उतना बढेगा।
जैन आर्मी ने थामी ध्वज पताका
दोपहर में गजरथ परिक्रमा का शुभारम्भ अयोध्यापुरी से हुआ, जिसमें आगे जैन आर्मी के अधिकारी ध्वज पताका लिए हुए अनुशासित ढंग से चल रहे थे। उनके पीछे कृष्णा वैंड उदयपुर की आकर्षक प्रस्तुति के साथ प्रत्येन्द्र, सत्येन्द्र इन्द्र-इन्द्राणियों का समूह ध्वज पताकाएं और कमलों को हाथ में लेकर चल रहा था। भव्य शोभायात्रा में सांगली महाराष्ट्र का दिव्य घोष, वीर व्यायामशाला, स्याद्वाद वर्धमान सेवा संघ, आदिनाथ सेवा संध, बाहुबली सेवा संघ का दिव्य घोष अपने स्वयं सेवकों के साथ प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। एकादश रथों के समूह के आगे तीन हाथियों पर पुण्यार्जक परिवार हाथों में ध्वज पताकाएं लिए हुए थे। उनके पीछे गजरथ के साथ क्रमशः अतिशय क्षेत्र पपौराजी, द्रोण गिरी जी, आहार जी, जैन समाज अशोकनगर, जैन समाज रहली, जैन समाज वाडी और ललितपुर का रजत रथ आकर्षण का केन्द्र रहे। जिनमें प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र राजेन्द्र जैन लल्लू थनवारा, सौधर्म इन्द्र सुमन-स्वतंत्र मोदी नाराहट, धनपति कुबेर अशोक जैन सुधा दैलवारा, महायज्ञ नायक रचना संजीव जैन सीए, शिरोमणि श्रावक श्रेष्ठी महेन्द्र कुमार सराफ, विधि यज्ञनायक प्रभात कुमार सराफ, भरत चक्रवर्ती रवीन्द्र अलया, बाहुबली संजीव कुमार ममता स्पोर्ट, ईशान इन्द्र विनय कुमार जैन मडावरा, सनत इन्द्र संजीव कुमार लकी, माहेन्द्र राजीव कुमार लकी, यज्ञनायक महेन्द्र कुमार सराफ, अखिलेश गदयाना, विनय जैन जडीबूटी,आलोक जैन लागौन, राजेन्द्र सराफ, संदीप सराफ लालू, वीरेन्द्र कुमार गंगचारी, महेन्द्र कुमार पालीवाले, राजकुमार खिरिया, राजा श्रेयांस राजीव अनौरा, राजा सोम डॉ. अक्षय टडैया, ब्रह्मेन्द्र राजेश सिंघई धौर्रा, लान्तव इन्द्र लोकेश सराफ, शुक्र इन्द्र शुभम सराफ, प्राणत इन्द्र अभय जैन पारौल, आणत इन्द्र शिरीष सिंघई, आरण इन्द्र अभिनंदन कुम्हैडी शतार इन्द्र पदमचंद मिठया, महामण्डलेश्वर विकास जैन सीए, अनूप जैन मामा भांजा, सुबोध जैन सुरभि, सन्मति सराफ, सतीश नजा विराजित रहे।
श्रीजी की रथयात्रा में ब्रह्मचारी भाई-बहनों के आगे निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर, मुनि पूज्य सागर महाराज, ऐलक धैर्यसागर, क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज उपस्थित धर्मालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे। गजरथ की परिक्रमाएं धार्मिक रीतिरिवाज से जब सम्पन्न हो रही थीं तो उनका आंखों देखा हाल जैन पंचायत के अध्यक्ष इंजीनियर अनिल अंचल स्वयं बता रहे थे।

हुआ श्रीजी का अभिषेक
परिक्रमा के उपरान्त श्रीजी को स्वयंसेवकों के दिव्यघोषों के साथ प्रतिष्ठा मंच पर विराजित किया, जहां श्रीजी का अभिषेक मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में हुआ। गजरथ महोत्सव की व्यवस्थाओं को मंदिर प्रबंधक राजेन्द्र जैन थनवारा मोदी, पंकज जैन, धार्मिक आयोजन संयोजक मनोज जैन बबीना के साथ मेला कैप्टन मेला कैप्टन नरेन्द्र कडंकी, कैप्टन राजकुमार जैन, पार्षद महेन्द्र सिंघई, वैभव जैन टिन्ना, स्वदेश गोयल संयोजित कर रहे थे।
एकादश रथोत्सव से ललितपुर ने बनाया रिकॉर्ड
मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में ललितपुर दिगम्बर जैन पंचायत ने एकादश रथोत्सव का आयोजन कर जैन समाज में एक रिकॉर्ड कायम किया, जिसमें पांच हजार से अधिक इन्द्र-इन्द्राणियों ने भक्ति की। गौरतलह रहे कि मुनि श्री के सानिध्य में 1992 में नवगजरथ का आयोजन भव्यता से हुआ था। मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार मुनि श्री के वर्ष 2022 के चातुर्मास में अभिनंदनोदय तीर्थ का अतिभव्य निर्माण हुआ, जिसमें त्रिकाल चौबीसी रजतमय चौबीसी, नन्दीश्वर, सहस्त्रकूट गुफा, कल्पवृक्ष मदिर सहित ज्ञानोदय तीर्थ में मुनिसुव्रतनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ मंदिर का निर्माण हुआ, जिनके लिए 1375 प्रतिमाओं की स्थापना की गई।













Add Comment