राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को कीर्तिनगर जैन मंदिर में सम्यक दर्शन में श्रुत ज्ञान का महत्व विषय पर सैकड़ों श्रुत साधकों की उपस्थिति में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को कीर्तिनगर जैन मंदिर में सम्यक दर्शन में श्रुत ज्ञान का महत्व विषय पर सैकड़ों श्रुत साधकों की उपस्थिति में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी के मुख्य वक्ता जैन दर्शन एवं प्राकृत विद्या शाखा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कमलेश जैन ने कहा कि सम्यक दर्शन की प्राप्ति में श्रुत ज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जिनवाणी आत्मकल्याण का पथ प्रदर्शित करती है तथा उसके अध्ययन, मनन और चिंतन से व्यक्ति के जीवन में सही दृष्टिकोण, विवेक और आध्यात्मिक जागृति का विकास होता है।
श्रुत आराधना एवं मंगलाचरण से हुआ आगाज
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक चांदवाड़ रहे, जबकि दीप प्रज्वलन प्रेम गंगवाल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रुत आराधना एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला, मंत्री महावीर चांदवाड़, गोष्ठी संयोजक सुदर्शन पाटनी तथा कीर्तिनगर जैन मंदिर समिति के मंत्री जगदीश जैन आदि ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
महोत्सव संयोजक रमेश गंगवाल एवं सीए विकास जैन ने बताया कि गुरुवार को प्रातः जनकपुरी जैन मंदिर में श्रुत स्कंध विधान का आयोजन होगा तथा शुक्रवार, 19 जून को प्रातः 7 बजे भव्य जिनवाणी रथ यात्रा निकाली जाएगी। रथ यात्रा को श्री महावीर दिगंबर जैन शिक्षा समिति के अध्यक्ष एवं श्री महावीरजी अतिशय क्षेत्र के मानद मंत्री श्रेष्ठी उमरावमल सांघी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
रथ यात्रा एवं धर्मसभा होगी
परिषद के मंत्री ने बताया कि रथ यात्रा एवं धर्मसभा में जिनवाणी सारथी के रूप में सीए प्रद्युम्न पाटनी, जिनवाणी वाहक के रूप में छुट्टनलाल जैन, धर्मसभा में दीप प्रज्वलन डॉ. राजकुमारी जी द्वारा किया जाएगा। वहीं वरिष्ठ सीए शांतीलाल गंगवाल मुख्य अतिथि तथा श्रेष्ठी अशोक खंडाका विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
स्वाध्याय की परंपरा को सुदृढ़ बनाने का आह्वान
परिषद के अध्यक्ष ने उपस्थित श्रुत साधकों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर जिनवाणी के प्रति श्रद्धा, सम्मान और स्वाध्याय की परंपरा को सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया। गोष्ठी का समापन संयोजक के धन्यवाद ज्ञापन एवं जिनवाणी स्तुति तथा नमोकार मंत्र से हुआ।
यह समाजजन उपस्थित रहे
सभा में परिषद के संरक्षक महेश चांदवाड़, डॉ. विमल जैन, कोषाध्यक्ष प्रद्युम्न पाटनी, सुरेंद्र जैन, अनिता वेद, शकुतंला बिंदायक्या, अनिता बिंदायक्या, डॉ. अक्षय जैन, भागचंद मित्रपुरा, योगेश टोडरका, मनीष वेद, विनोद कोटखावदा, अनिल छाबड़ा, हीराचंद वेद, कमल वेद, सुधीर लाली, ममता संघी, आशा जैन, बुद्धिप्रकाश छाबड़ा, मिश्रीलाल, राजेंद्र पाटनी, अनिल टोंग्या, सोभाग अजमेरा, प्रदीप चांदवाड़, प्रेमचंद जैन, ताराचंद गोधा, हरकचंद जैन, राजेंद्र पापड़ीवाल, उदयभान जैन, राजेंद्र ठोलिया, उर्मिला जैन, मधु पंड्या, ज्ञानचंद जैन उपस्थित रहे।













Add Comment