सनावद में आर्यिका 105 प्रशांत मति माताजी के 41वें संयम दिक्षा दिवस पर भव्य भजन निशा का आयोजन हुआ। भजनों की मधुर प्रस्तुति ने सभी को भक्ति में डुबो दिया और पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। सन्मति जैन काका की रिपोर्ट
सनावद । सनावद में परम् पूज्य विदुषी आर्यिका 105 प्रशांत मति माताजी के 41वें संयम दिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी में भव्य भजन निशा का आयोजन किया गया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का सुंदर वातावरण देखने को मिला।
भजनों ने बांधा समां
इस भजन निशा में संगीता पाटोदी, पूर्णिमा जैन, दीपांशी जैन, सभ्यता जैन, सारिका जैन, राजू जैन, पंकज जटाले, प्रशांत चौधरी, कमल के के और सुदेश जटाले ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी।
उनकी प्रस्तुति ने सभी श्रद्धालुओं को भक्ति में इतना लीन कर दिया कि पूरा वातावरण भाव-विभोर हो गया।
आर्यिका माताजी का प्रेरणादायी जीवन
सन्मति जैन काका ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यिका प्रशांत मति माताजी का जन्म 3 अक्टूबर 1956 को भावनगर (गुजरात) में हुआ था।
उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत नसलापुर में आचार्य शुभल सागर जी महाराज से लिया तथा 22 अप्रैल 1986 को मुनि श्री दया सागर जी महाराज से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की।
दिक्षा से पूर्व उनका नाम ब्रह्मचारिणी पंकज बेन था। उन्हें विदुषी आर्यिका की उपाधि भी प्राप्त है।
ज्ञान और साधना की धारा
माताजी ने वर्ष 2012 और 2013 में सनावद एवं समीपस्थ सिद्ध क्षेत्र पोदनपुरम में चातुर्मास कर अपने ज्ञान और प्रवचनों से समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। उनके उपदेशों ने अनेक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
प्रभावना वितरण और समाज की सहभागिता
इस पावन अवसर पर प्रत्यूष जैन, महेन्द्र कुमार मुंशी, अरविंद जैन, अक्षय जैन, लोकेंद्र जैन, सरल जटाले और शौभाग्यचंद जैन सहित गुरु मां भक्त मंडल द्वारा प्रभावना वितरित की गई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और सभी ने भक्ति का आनंद लिया।













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