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राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज का द्वितीय समाधि स्मृति दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया : कोल्हापुर में मुनि संघ के सानिध्य में हुए गुरु भक्ति एवं विशेष धार्मिक आयोजन


कोल्हापुर में राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज का द्वितीय समाधि स्मृति दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि संघ के सानिध्य में विशेष पूजन, गुरु भक्ति एवं प्रेरक प्रवचन हुए। पढ़िए श्रीफल साथी अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट।


कोल्हापुर। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 4 जुलाई 2026 को राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज का द्वितीय समाधि स्मृति दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया गया। कार्यक्रम मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

विशेष पूजन एवं गुरु भक्ति

समाधि स्मृति दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना, गुरु भक्ति एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

मुनि संघ ने सुनाए प्रेरक प्रसंग

पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के जीवन, तप, त्याग तथा समाधि से पूर्व के प्रेरणादायी प्रसंगों का उल्लेख किया। उनके ओजस्वी उद्बोधनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

महान तपस्वी और गुरु परंपरा के गौरव

गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज दिगंबर जैनाचार्य परंपरा के तेजस्वी संत रहे। उनका जन्म 2 मई 1963 को मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पथरिया में हुआ था। बाल्यकाल का नाम अरविंद था। वर्ष 1980 में क्षुल्लक दीक्षा तथा वर्ष 1983 में मुनि दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात उन्होंने कठोर साधना एवं धर्म प्रभावना का अद्वितीय कार्य किया। 8 नवम्बर 1992 को सिद्धक्षेत्र द्रोणागिरी में उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया। अपने जीवनकाल में उन्होंने 227 शिष्यों को दीक्षा देकर श्रमण परंपरा को समृद्ध किया।

श्रद्धालुओं की रही सक्रिय सहभागिता

कार्यक्रम में मीनाक्षी नकाते, शैला पाटील, शिल्पा पाटील, राजश्री पाटील, कांचन मुरचिट्टे, प्रतिभा आळतेकर, नंदिनी कमते, रेश्मा शहा, वंदना नाईक, सुषमा कारंडे, अनघा सांगरुळकर, कविता बड्डे, सुजाता किणे, जयश्री गाट, सुजाता रोटे, जयश्री पाटील, दामिनी जैन, सोनाली उपाध्ये, विक्रांत नाईक, ब्रह्मकिरण उपाध्ये, विपुल जैन, सुमित ओसवाल, विद्याधर खोत, भूषण कावळे एवं अभिषेक पाटील सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

गुरु स्मृति से मिला प्रेरणा का संदेश

समाधि स्मृति दिवस के माध्यम से श्रद्धालुओं ने गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं धर्म प्रभावना के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और गुरु भक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सम्पन्न हुआ।

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