सनावद में चातुर्मासरत युगल मुनिराजों के सानिध्य में रक्षाबंधन पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। पिच्छिका को रक्षा सूत्र बांधा गया और श्रेयांशनाथ भगवान के निर्वाण दिवस पर लड्डू अर्पित किए गए। गुरुदेवों ने रक्षाबंधन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। सन्मति जैन काका की रिपोटर
सनावद। नगर में चातुर्मासरत युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शनिवार को वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन कर ग्यारहवें तीर्थंकर श्रेयांशनाथ भगवान के मोक्ष दिवस पर लड्डू अर्पित किया गया।
शांति धारा का सौभाग्य सहज जितेंद्र कुमार जैन पंधाना परिवार को प्राप्त हुआ। श्रेयांशनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक का लड्डू सभी समाजजनों ने सामूहिक रूप से चढ़ाया। तत्पश्चात मुनि श्री की पिच्छिका को रक्षा सूत्र बांधने का कार्यक्रम हुआ।
रक्षा की प्रेरणादायक घटना सुनाई
मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने रक्षाबंधन को वात्सल्य पूर्णिमा बताते हुए कहा कि यह अपने शुभ भावों की रक्षा करने और धर्म की रक्षा का संकल्प लेने का दिन है। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने जैन इतिहास के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए विष्णुकुमार मुनि द्वारा 700 मुनियों की रक्षा की प्रेरणादायक घटना सुनाई। आहारदान का सौभाग्य श्रीमती शोभा चौधरी परिवार एवं पुष्पा सुनील जैन पांवणा परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।













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