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नवागढ़ में प्राकृत विद्या प्रशिक्षण कार्यशाला आरंभ: विद्वानों की रही गरिमामयी उपस्थिति


प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से नवागढ़ में त्रिदिवसीय प्राकृत विद्या प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार प्रातः 8 बजे भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में विद्वान शिक्षकों, प्राकृत प्रेमियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। नवागढ़ से पढ़िए, यह खबर…


नवागढ़। प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से नवागढ़ में त्रिदिवसीय प्राकृत विद्या प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार प्रातः 8 बजे भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में विद्वान शिक्षकों, प्राकृत प्रेमियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम का प्रारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जिसके पश्चात वक्ताओं ने प्राकृत भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक समृद्धि एवं वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. आशीष जैन (दमोह), डॉ सुनील संचय ललितपुर, डॉ. आशीष जैन शास्त्री (बम्होरी), राजकुमार जैन शास्त्री (सागर), डॉ. निर्मल जैन आदि विषय विशेषज्ञ विद्वानों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुधाकर पांडेय (थाना प्रभारी सौजना), श्रवण कुमार पांडेय (एसआई), चंचल शर्मा (एसआई), रोविन जैन (तहसीलदार, दमोह), श्रीपाल वांसा, रामनारायण यादव (सरपंच) आदि उपस्थित रहे। अतिथियों व विद्वानों ने अपने उद्बोधन में प्राकृत भाषा को भारतीय संस्कृति की मूल धारा बताते हुए इसके अध्ययन-अध्यापन को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. शैलेश जैन (उदयपुर) द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को रोचक एवं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया।

प्रशिक्षण शिविर की प्राकृत भाषा के प्रति जन-जागरण में भूमिका

कार्यशाला के संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि प्रथम दिवस पर विभिन्न शैक्षणिक सत्रों एवं समूह परिचर्चाओं का आयोजन किया गया। जिनमें प्रतिभागियों को प्राकृत भाषा की मूलभूत संरचना, व्याकरणिक स्वरूप तथा व्यवहारिक प्रयोग से परिचित कराया गया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा सरल एवं व्यवहारिक पद्धति से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे प्रतिभागी न केवल प्राकृत को समझ सकें, बल्कि उसे प्रभावी रूप से पढ़ा और पढ़ा सकें। मुख्य अतिथि पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर प्राकृत भाषा के प्रति जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन भाषाई विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। कार्यशाला के आगामी सत्रों में प्राकृत साहित्य, अनुवाद, व्याकरण एवं शिक्षण विधियों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अतिथियों का स्वागत किया 

सभी प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता एवं निरंतर अभ्यास का आह्वान किया गया, ताकि प्राकृत भाषा के संरक्षण का यह अभियान और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बन सके। आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्था एवं अनुशासन की भी उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा सराहना की गई। क्षेत्र कमेटी की ओर से महामंत्री वीरचंद जैन नेकौरा, संदीप जैन एडवोकेट ने अतिथियों का स्वागत किया।

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