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आचार्य विशुद्ध सागर जी गुरुदेव का दीक्षा जयंती समारोह भी मनाया : मुनि सुयश सागर संसघ का पिच्छिका परिवर्तन महामहोत्सव


बीते पांच महीनों से कोडरमा जिला में चातुर्मास कर धर्म की गंगा बहाने वाले मुनि श्री 108 सुयश सागर जी ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह एवं आचार्य विशुद्ध सागर जी गुरुदेव का दीक्षा जयंती समारोह कार्यक्रम बड़े भव्य रूप से मनाया गया। पढ़िए राजकुमार अजमेरा और नवीन जैन की रिपोर्ट…


 

झुमरीतिलैया। बीते पांच महीनों से कोडरमा जिला में चातुर्मास कर धर्म की गंगा बहाने वाले मुनि श्री 108 सुयश सागर जी ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह एवं आचार्य विशुद्ध सागर जी गुरुदेव का दीक्षा जयंती समारोह कार्यक्रम बड़े भव्य रूप से मनाया गया। आचार्य श्री की पूजा भक्ति भाव से की गई। पिच्छिका परिवर्तन की शुरुआत मंगलाचरण भाव नृत्य के साथ हुई। मंगलाचरण के रूप में सुबोध-आशा गंगवाल के भजनों के साथ भक्ति प्रस्तुति हुई। मंच संचालन समाज के उप मंत्री राज छाबड़ा ने किया। समाज की छोटी-छोटी बच्चियों ने स्वागत नृत्य किया। समाज के मंत्री ललित सेठी एवं संयोजक नरेंद झांझरी ने पूरे चातुर्मास काल में कार्यकर्ताओं के सहयोग की सराहना करते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

सौभाग्यशालियों को मिलती है पिच्छी

इस अवसर पर मुनि सुयश सागर जी ने कहा कि झारखंड प्रदेश में कोडरमा नगरी धर्म नगरी है। यहां के लोग धर्म प्रिय और संस्कृति की रक्षा करने वाले हैं समाज में हर व्यक्ति जरूरी होता है। सभी के योगदान से ही बड़े से बड़ा कार्य सफल होता है। पांच महीने के दौरान कोडरमा जैन समाज ने जिस तरह सभी कार्यों को उत्साह और उमंग के साथ धर्म प्रभावना की, वह सराहनीय है। अतिथि का स्वागत सत्कार भी समाज ने बखूभी से निभाया। पिच्छिका भेंट करने सैकड़ो लोगों ने आज गुरुदेव के साथ पिच्छी को लेकर नगर भ्रमण किया। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म में पिच्छिका का बड़ा महत्व है। इसके बिना जैन में कोई मुनि नहीं हो सकता। मुनि श्री ने कहा कि यह उपकरण पिच्छी जैन साधु एवं साध्वियों का पहचान चिह्न है। पिच्छी यदि किसी कारणवश छूट जाती है या गुम हो जाती है तो जैन साधु एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाता है क्योंकि इससे जीवों की हिंसा का दोष लगता है। बड़े ही भाग्यशाली और धार्मिक व्यक्ति को ही गुरुजनों की पिच्छी मिलती है। मुनिश्री 108 सुयश सागर जी ने अपने हाथों से अपनी पुरानी पिच्छी गुरु भक्त सिद्धांत-पायल, ललित-नीलम सेठी परिवार को दी। वहीं 105 श्री सोहम सागर जी महाराज ने अपनी पिच्छीका ममता-सुनील सेठी परिवार को दी, 105 श्रुत सागर जी महाराज ने अपनी पिच्छी अजय- अलका सेठी परिवार को दी। इस मौके पर समाज के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र काला, सुरेश झाझंरी, जयकुमार गंगवाल, सुशील छाबड़ा, पदम सेठी, सुरेश सेठी, दिलीप बाकलीवाल, मनीष सेठी, राजीव छाबड़ा, सुनीता सेठी, पार्षद पिंकी जैन आदि श्रद्धालु भक्त जनों को गुरुदेव ने आशीर्वाद प्रदान किया।

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