समाचार

पावापुरी तीर्थ पर त्याग और वैराग्य की अनूठी झलक : अनीश (पार्थ) भैया की जैनेश्वरी दीक्षा देखने उमड़े लोग 


पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से प्रारंभ हुआ। हर कोई पावापुरी तीर्थ ये दृश्य देखने को ललायित दिख रहा है। दूर-दूर से जैन धर्मावलंबी पावापुरी आ रहे है। पावापुरी से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर…


पावापुरी/ बिहार। भगवान महावीर की निर्वाण भूमि पावापुरी के पावन प्रांगण में इन दिनों भक्ति और वैराग्य की गंगा बह रही है। अवसर है श्री मज्जिनेन्द्र चौबीसी पंचकल्याणक महोत्सव का। जिसके तीसरे दिन यानी शुक्रवार को एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में उनके संघस्थ बाल ब्रह्मचारी अनीश भैया (पार्थ भैया), जो संसार की समस्त मोह-माया का त्याग कर दिगम्बर जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो रहे हैं। महोत्सव के तीसरे दिन ‘तप कल्याणक’ के विशेष अवसर पर अनीश भैया के दीक्षा संस्कार हुए। वैराग्य के इस उत्सव की शुरुआत शुक्रवार को प्रातः काल बड़े ही भक्तिमय वातावरण में हुई। कार्यक्रम में केशलोच, मेहंदी और हल्दी की रस्में निभाई गईं। यह दृश्य देखकर वहां उपस्थित जनसैलाब की आंखें नम थीं तो दूसरी ओर एक युवा के दृढ़ संकल्प को देखकर हर कोई नतमस्तक था।

अनीश भैया अपने माता-पिता की इकलौती संतान

अनीश भैया की यह दीक्षा समाज के लिए एक ज्वलंत उदाहरण है। मात्र 26 वर्ष की अल्पायु में जहां युवा अपने करियर और सांसारिक सुखों के पीछे भागते हैं, वहां अनीश भैया ने आत्म-कल्याण का मार्ग चुना। विशेष बात यह है कि अनीश भैया अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनका न कोई भाई है और न ही कोई बहन। एक माता-पिता के लिए अपनी एकमात्र संतान को संयम के मार्ग पर भेजना हृदय को झकझोर देने वाला निर्णय होता है लेकिन, मोक्ष मार्ग की श्रेष्ठता को समझते हुए इस परिवार ने अपनी ‘आंखों के तारे’ को राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए गुरु चरणों में समर्पित कर दिया।

संघस्थ अलका दीदी ने बताया कि पावापुरी में इस समय भक्तों का भारी हुजूम उमड़ा हुआ है।

जयकारों से गुंजायमान रहा पांडाल

शुक्रवार को कोडरमा, हजारीबाग, डिमापुर, नवादा, मुम्बई,गुजरात, इंदौर आदि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बने। मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज का मंगल आशीर्वाद पाकर अनीश भैया अब सांसारिक चोले को त्याग कर ऐलक वेष धारण करेंगे। पूरा पावापुरी क्षेत्र “जय बोलो संयम मार्ग की” के जयकारों से गुंजायमान है। तैयारियां अपने चरम पर हैं और हर श्रद्धालु इस दीक्षा महोत्सव को सफल बनाने में पूरी तन्मयता से जुटा हुआ है। यह दीक्षा न केवल एक व्यक्ति का परिवर्तन है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए संदेश है कि असली सुख सुविधाओं में नहीं, बल्कि साधना और त्याग में है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
1
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page