यह बहुत दुखद और दिल तोड़ने वाली खबर है कि पंडित विजयकुमार राउत रविवार को सुबह एक छोटी सी बीमारी की वजह से गुज़र गए। उनके जाने से समाज ने एक आदर्श इंसान खो दिया है। पंडित ने अपनी ज़िंदगी के आखिर तक जैन धर्म के नियमों का पूरी लगन से पालन किया। वाशिम से पढ़िए, यह खबर…
वाशिम। यह बहुत दुखद और दिल तोड़ने वाली खबर है कि पंडित विजयकुमार राउत रविवार को सुबह एक छोटी सी बीमारी की वजह से गुज़र गए। उनके जाने से समाज ने एक आदर्श इंसान खो दिया है। पंडित ने अपनी ज़िंदगी के आखिर तक जैन धर्म के नियमों का पूरी लगन से पालन किया। हीमोग्लोबिन कम होने और इलाज के लिए खून लेने की सलाह दिए जाने के बावजूद, उन्होंने अपने धार्मिक उसूलों से कोई समझौता नहीं किया। जैन धर्म के नियम किसी भी हालत में नहीं टूटने चाहिए, यह उनका पक्का इरादा आखिर तक कायम रहा। 76 साल की उम्र में भी उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए समाधि ले ली, जो उनके बहुत बड़े आत्मबल की निशानी है। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कई सामाजिक और धार्मिक कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने ज़िंदगी भर इस भावना के साथ काम किया कि अपनी भलाई के साथ-साथ दूसरों की भी भलाई हो।
श्री आंतरिक पार्श्वनाथ दिगंबर जैन संस्थान शिरपुर (जैन) में उनका योगदान बहुत ही नया और प्रेरणा देने वाला था। उनके जाने से जो सामाजिक और धार्मिक खालीपन पैदा हुआ है, उसे कभी नहीं भरा जा सकेगा।श्री दिगंबर जैन महासमिति विदर्भ वाइस प्रेसिडेंट प्रो. प्रशांत प्रमोद गाडेकर ने बताया कि उनके बेटे डॉ. स्वप्निल, कल्पेश और अक्षय ने अपने आखिरी दिनों में पूरी लगन और भक्ति से सेवा की। भगवान उनकी पवित्र आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को यह दुख सहने की ताकत दे, यही मेरी प्रार्थना है। समाजजनों ने उनकी याद में विनम्र अभिवादन और दिल से श्रद्धांजलि की। श्री दिगंबर जैन महासमिति विदर्भ एग्जीक्यूटिव वाशिम जिला की ओर से सभी जिला और तालुका पदाधिकारियों और पूरे जैन समुदाय की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।













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