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मुनि विशोध सागर जी ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के लिए किया मंगल विहार : सर्वोदय पाठशाला की छात्राओं का सम्मान, मुनि निरंजन सागर जी के प्रवचनों का मिल रहा धर्मलाभ


अशोकनगर में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के लिए मंगल विहार किया। इस अवसर पर सर्वोदय पाठशाला की छात्राओं को सम्मानित किया गया तथा मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज के प्रेरक प्रवचनों का श्रद्धालुओं ने लाभ प्राप्त किया। पढ़िए श्रीफल साथी विजय धुर्रा की यह रिपोर्ट।


अशोकनगर। परम पूज्य आचार्य आर्जव सागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के लिए मंगल विहार किया। जैन समाज के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई देते हुए उनके मंगल विहार में सहभागिता की। बगीचे मंदिर से प्रारंभ हुआ विहार पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचा, जहां युगल मुनिराज ने वंदना कर आगे की यात्रा प्रारंभ की।

गुणों का अर्जन ही जीवन की सार्थकता

आदिश्वर धाम, सुभाषगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में परिश्रम करने वाले अपना इतिहास स्वयं लिखते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव गुणों का अर्जन और अवगुणों का त्याग करते रहना चाहिए। संसारी व्यक्ति प्रायः दूसरों के दोष देखने में लगा रहता है, जबकि आत्मकल्याण के लिए सद्गुणों को देखने और अपनाने की आदत विकसित करनी चाहिए।

सर्वोदय पाठशाला की छात्राओं का सम्मान

इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला, शांति नगर की छात्राओं को मुनि संघ के सान्निध्य में सम्मानित किया गया। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि समाज को अल्प प्रवास में भी संत समागम, प्रवचन, अभिषेक, शांतिधारा एवं धार्मिक आयोजनों का भरपूर लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी समाजजनों से सहयोग के लिए क्षमायाचना भी की।

संत सदैव रहते हैं सावधान

गंज मंदिर में विराजमान मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संत अपनी चर्या के पालन में सदैव सावधान रहते हैं। वे प्रत्येक क्षण अपने आचरण और कर्मों के प्रति सजग रहते हुए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने संयमपूर्ण जीवन को आत्मकल्याण का आधार बताया।

श्रद्धालुओं ने लिया मंगल विहार का लाभ

मंगल विहार में थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन (टींगू), संयोजक मनोज रन्नौद, विमल कुमार, सर्वोदय पाठशाला शांति नगर की छात्राओं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मुनि संघ का रात्रि विश्राम मनोज रन्नौद के निवास परिसर में निर्धारित रहा।

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