इस बार 22 जून से मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार अतिवृष्टि एवं बाढ़ के योग भी बनते दिखाई देते हैं। आर्द्रा प्रवेश लग्न से ज्योतिष में वर्षा कम, ज्यादा, सामान्य आदि का ज्योतिष द्वारा पूर्वानुमान करने की परंपरा शुरू से रही है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट…
मुरैना। इस बार 22 जून से मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार अतिवृष्टि एवं बाढ़ के योग भी बनते दिखाई देते हैं। आर्द्रा प्रवेश लग्न से ज्योतिष में वर्षा कम, ज्यादा, सामान्य आदि का ज्योतिष द्वारा पूर्वानुमान करने की परंपरा शुरू से रही है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि जिस दिन सूर्य मिथुन राशि में रहते हुए आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है, उसी समय की लग्न के अनुसार वर्षा की स्थिति का ज्ञान किया जाता है।
इस वर्ष आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश 22 जून को दोपहर 12.26 बजे होगा। उस समय कन्या लग्न होगी। तिथि अष्टमी के अनुसार आद्रा प्रवेश से कहीं-कहीं वर्षा कम होगी। जिससे अन्न, वस्त्र और महंगे होंगे। वर्षा अनेक स्थानों पर पर्याप्त नहीं होगी। सोमवार को आद्रा प्रवेश होने से वर्षा ऋतु में जनता शांति महसूस करेगी। हस्त नक्षत्र में आद्रा प्रवेश से सभी धान्यों की उत्पत्ति से सुख मिलेगा।
आर्द्रा लग्न में एकादश भाव में गुरु एवं शुक्र की युति श्रेष्ठ योग
वरियान योग में आद्रा प्रवेश करने से अनेक स्थानों पर समय पर वर्षा उचित मात्रा में नहीं होने से सूखे की स्थिति बनेगी जिससे कंदमूल फल की आगे कमी रहेगी।
दोपहर के समय आद्रा प्रवेश करने से असामान्य वर्षा कुछ स्थानों पर खंड वर्षा कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक होने से कृषि में हानि, तृण, घास की हानि रहेगी और धान्य महंगे होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. जैन ने बताया कि आर्द्रा लग्न में एकादश भाव में गुरु एवं शुक्र की युति श्रेष्ठ योग बना रही है। 22 जून से कर्क राशि में ग्रहों के राजकुमार बुध पहुंचेंगे, जो शुक्र और गुरु से कर्क जल राशि में त्रिग्रही युति बनाएंगे। इस जलीय युति के कारण देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश, अतिवृष्टि, भीषण बाढ़ और जल भराव जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं।
बिजली गिरने की घटनाओं से उपद्रवकारी रहेगी
संभावना व्यक्त की जा रही है कि 22 जून के बाद द्वितीय ज्येष्ठ शुक्ल के अंतिम सप्ताह में मानसून कुछ राज्यों में सक्रिय होगा। आषाढ़ माह अर्थात 01 जुलाई से 15 तक फिर खंड वर्षा अर्थात मध्यप्रदेश के पूर्वी क्षेत्र सहित पूर्वी हिस्से में रहेगी। इस समय धान रोपाई विलंब से होगी। 16 से 29 जुलाई तक ज्यादातर राज्यों में मानसून सक्रिय रहेगा। इस बार पूर्वी भारत में वर्षा वायु वेग एवं गरज, चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाओं से उपद्रवकारी रहेगी।
सितंबर 15 के बाद वर्षा की अचानक विदाई
श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक बादल चाल विशेष रूप से सक्रिय रहेगी और सर्वत्र वर्षा का योग है। सितंबर 15 के बाद इस बार वर्षा की अचानक विदाई हो सकती हैं। इस समय चंद्रमास से भाद्रपद का शुक्ल पक्ष होगा। ऐसे में धान की फसल वाले क्षेत्रों को पानी की कमी से फसल को हानि के योग बनते हैं।













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